पश्चिम बंगाल: में औद्योगिक विकास को गति देने और नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक नई 'इंसेंटिव पॉलिसी' (Incentive Policy) और 'लैंड पुलिंग' योजना घोषित करने जा रही है। दुर्गा पूजा से पहले नई उद्योग नीति की घोषणा करने की तैयारी चल रही है, जिसके तहत निवेशकों को बिजली दरों, राज्य जीएसटी (SGST) और स्टाम्प ड्यूटी में राहत देने का खाका तैयार किया जा रहा है। हालांकि, नई नीति को धरातल पर उतारने से पहले सरकार के सामने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के इंसेंटिव मद में बकाए पड़े लगभग 18,000 करोड़ रुपये के बोझ और उससे जुड़ी जटिल कानूनी अड़चनों को सुलझाने की बड़ी चुनौती खड़ी है।
इंसेंटिव के लिए सख्त मानक और बिजली-जीएसटी में छूट पर रिपोर्ट
नबान्न सूत्रों का कहना है कि नई नीति में पिछली सरकारों की तरह अंधाधुंध इंसेंटिव नहीं दिया जाएगा। इस बार निवेश की श्रेणी, परियोजना की प्रकृति, कुल बजट और उससे उत्पन्न होने वाले स्थायी व अस्थायी रोजगार के आंकड़ों को ध्यान में रखकर ही प्रोत्साहन राशि तय होगी।
- बिजली दर में छूट: बिजली विभाग को संभावित निवेशकों को बिजली दरों में दी जाने वाली छूट पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है।
- स्टेट जीएसटी (SGST): वित्त विभाग यह आकलन कर रहा है कि राज्य जीएसटी में कितनी छूट दी जा सकती है।
- स्टाम्प ड्यूटी में राहत: उद्योगों के लिए जमीन खरीदने या लीज पर लेने के दौरान स्टाम्प ड्यूटी में छूट देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।
उद्योगों के लिए 'लैंड पुलिंग' का नया मॉडल
पश्चिम बंगाल जैसे घनी आबादी वाले राज्य में उद्योगों के लिए एकमुश्त बड़ी जमीन मिलना एक प्रमुख समस्या रही है। पूर्ववर्ती सरकार के समय 'लैंड बैंक' की बात कही गई थी, लेकिन धरातल पर उसकी उपलब्धता बेहद सीमित रही। इस समस्या के हल के लिए सरकार 'लैंड पुलिंग' (Land Pooling) नीति पर गंभीरता से विचार कर रही है।
- कैसे काम करेगी लैंड पुलिंग: सरकार निजी भू-स्वामियों से बाजार दर पर जमीन खरीदकर उसे विकसित करेगी और बुनियादी ढांचा तैयार कर निवेशकों को सौंपेगी।
- जमीन दाताओं को लाभ: हस्तांतरित जमीन के 90 प्रतिशत हिस्से पर उद्योग स्थापित होगा, जबकि शेष 10 प्रतिशत हिस्सा मूल जमीन मालिकों को सहायक व्यवसाय (Ancillary Business) शुरू करने के लिए दिया जा सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार और सहभागिता बढ़ेगी।
पुराने वादों की कानूनी उलझन और बंद पड़ी जमीनों की वापसी
राज्य के अधिकारियों के मुताबिक, 2024 में पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार ने कानून बनाकर औद्योगिक इंसेंटिव बंद कर दिए थे। वादे के मुताबिक प्रोत्साहन राशि न मिलने पर कई निवेशकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिससे लगभग 18,000 करोड़ रुपये का बकाया और कानूनी अड़चनें पैदा हुईं।
- नई इंसेंटिव पॉलिसी लागू करने से पहले सरकार को पुराने कानून को वापस लेना होगा और न्यायालय में लंबित मामलों का कानूनी समाधान निकालना होगा।
- वाममोर्चा और टीएमसी के कार्यकाल के दौरान जिन औद्योगिक समूहों ने बड़े निवेश के नाम पर जमीनें ली थीं और जहां अब तक कारखाने नहीं लगे, उन जमीनों को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लेने के रास्ते खोजे जा रहे हैं।
उद्योग मंत्री तापस राय की अगुवाई में बैठकों का दौर जारी
औद्योगिक नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए उद्योग मंत्री तापस राय की अध्यक्षता में मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। वित्त और बिजली विभागों से अंतिम रिपोर्ट मिलते ही इस नीति की रूपरेखा तय कर ली जाएगी। इस विषय पर पूछे जाने पर उद्योग मंत्री तापस राय ने संक्षेप में कहा, "अभी इस पर कुछ नहीं कहूंगा, सही समय आने पर सभी जानकारियां विस्तार से साझा की जाएंगी।"