कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान संपन्न होते ही विवादों का सिलसिला शुरू हो गया है। जहां 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में एक भी पुनर्मतदान (Repoll) की मांग नहीं उठी थी, वहीं 29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के बाद अचानक 77 बूथों पर फिर से मतदान कराने की मांग ने हलचल मचा दी है। खास बात यह है कि ये सभी बूथ दक्षिण 24 परगना जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं।
कहां से आईं कितनी शिकायतें?
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, बुधवार शाम तक कुल 77 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले इन क्षेत्रों से हैं:
फलता: 32 शिकायतें
डायमंड हार्बर: 29 शिकायतें
मगराहट: 13 शिकायतें
बजबज: 3 शिकायतें
ज्यादातर मांगें प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की ओर से आई हैं। आरोपों में कहा गया है कि कहीं ईवीएम पर टेप चिपका दिया गया, कहीं ईवीएम पर 'इत्र' छिड़क दिया गया, तो कहीं सीसीटीवी कैमरों को रुमाल से ढक दिया गया ताकि धांधली छिपाई जा सके।
पॉकेट में 'स्पाई कैमरा' का सनसनीखेज आरोप
सबसे चौंकाने वाली शिकायत डायमंड हार्बर के मगराहट पश्चिम से आई है। आरोप है कि कुछ वोटरों की शर्ट की जेब में 'स्पाई कैमरा' लगाया गया था। इसका मकसद यह पता लगाना था कि वोटर किस पार्टी को वोट दे रहा है। चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
आज होगी आयोग की आपात बैठक
पहले चरण के शांतिपूर्ण मतदान के बाद दूसरे चरण में इतनी बड़ी संख्या में पुनर्मतदान की मांग चुनाव आयोग के लिए चिंता का विषय है, खासकर तब जब उत्तर प्रदेश के चर्चित अधिकारी अजय पाल शर्मा इस जिले के पुलिस पर्यवेक्षक थे। आयोग आज, गुरुवार को एक आपात बैठक करने जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई गई, तो 1 मई को इन 77 बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश जारी किया जा सकता है।