कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग के आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी की ओर से दाखिल RTI के जवाब में आयोग ने बताया कि SIR से जुड़े अपीलीय अधिकरणों द्वारा अब तक निपटाए गए 82,782 मामलों में 75,443 यानी करीब 91% मामलों में मतदाताओं के नाम फिर से सूची में शामिल किए गए। वहीं, 7,339 मामलों यानी 8.86% अपीलों में नाम बहाल नहीं किए गए। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद शुरुआती स्तर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने निर्वाचन आयोग से और अधिक पारदर्शिता की मांग की है।
91% मामलों में नाम बहाल, आंकड़ों ने बढ़ाई राजनीतिक बहस
RTI से मिले आंकड़ों के मुताबिक, अपीलीय अधिकरणों के सामने पहुंचे जिन मामलों का अब तक फैसला हुआ, उनमें बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए गए। कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने इन आंकड़ों को SIR प्रक्रिया की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनका तर्क है कि यदि अपील के बाद इतनी बड़ी संख्या में नाम वापस जोड़े जा रहे हैं, तो शुरुआती स्तर पर नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके आधार की जांच जरूरी है। हालांकि, नाम बहाली का प्रतिशत अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि शुरुआती सभी विलोपन गलत थे। अपीलों में अलग-अलग परिस्थितियों और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लिए जा सकते हैं। इसलिए पूरे आंकड़ों और मामलों की प्रकृति को समझना जरूरी है।
38.10 लाख अपीलों का आंकड़ा क्यों बना सवाल?
RTI जवाब में सामने आए आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने एक और सवाल उठाया है। बताया गया है कि SIR की प्रक्रिया में 27,28,500 मतदाताओं को 'Not Eligible' दर्ज किया गया था। वहीं, कुल 38,10,620 अपीलें दाखिल हुईं। यानी अपीलों की संख्या 'Not Eligible' दर्ज मतदाताओं की संख्या से करीब 10.82 लाख अधिक है। कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाया है कि इतनी अतिरिक्त अपीलें किस आधार पर दाखिल हुईं और इनमें कितने मामले मतदाताओं की ओर से तथा कितने अन्य पक्षों की ओर से थे।
जिलों में भी सामने आई अलग-अलग तस्वीर
RTI से मिले आंकड़ों में अलग-अलग जिलों में अपीलों और नाम बहाली की स्थिति में काफी अंतर दिखाई देता है। मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा 7,47,305 अपीलें दाखिल हुईं। इनमें अब तक निपटाए गए मामलों में 434 नाम बहाल किए गए, जबकि 53 मामलों में नाम खारिज रहे। मालदा में 5,31,149 अपीलें दर्ज हुईं। निपटाए गए 1,471 मामलों में सभी नाम दोबारा सूची में शामिल किए गए। उत्तर 24 परगना में 3,58,872 अपीलें दाखिल हुईं और निपटाए गए 277 मामलों में सभी नाम बहाल किए गए। दक्षिण 24 परगना में 3,21,332 अपीलें दर्ज हुईं। इनमें 20,107 नाम बहाल हुए, जबकि 24 मामलों में नाम खारिज किए गए। इसके अलावा हुगली में 19,528 और दार्जिलिंग में 159 नाम बहाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। दार्जिलिंग में निपटाए गए मामलों में केवल एक नाम खारिज हुआ।
सुप्रीम कोर्ट में भी SIR को लेकर मामला
SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बोस, जो इस मामले में याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं, ने अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और सभी पात्र मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने तथा अपील करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
निकाय चुनाव से पहले मतदाता सूची पर बढ़ी नजर
वर्ष के अंत में प्रस्तावित कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। विपक्षी दलों की मांग है कि SIR से संबंधित अपीलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से किया जाए, ताकि अंतिम मतदाता सूची तैयार होने से पहले पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित रूप से शामिल हो सकें। फिलहाल, SIR से जुड़े अपीलीय अधिकरणों में मामलों की सुनवाई जारी है और आने वाले फैसले पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं।