कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, "समान नागरिक संहिता, पश्चिम बंगाल, 2026" नामक प्रारूप विधेयक की विस्तृत समीक्षा और परीक्षण के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति तत्काल प्रभाव से कार्य करेगी और विधेयक के विभिन्न कानूनी, सामाजिक एवं प्रशासनिक पहलुओं का गहन अध्ययन करेगी।

सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव
अधिसूचना में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करे। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने एक प्रारूप विधेयक तैयार किया है, जो राज्य के सभी निवासियों पर समान रूप से लागू होने वाले नागरिक कानूनों का ढांचा प्रस्तुत करता है। प्रस्तावित विधेयक में विवाह, तलाक, बिना वसीयत उत्तराधिकार (इंटेस्टेट सक्सेशन) और वसीयत के माध्यम से उत्तराधिकार (टेस्टामेंटरी सक्सेशन) जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों को एक समान कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत लाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे धर्म, आस्था या समुदाय के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान व्यवस्था लागू की जा सके।
व्यापक समीक्षा के लिए गठित की गई विशेषज्ञ समिति
सरकार ने माना है कि यह विषय अत्यंत व्यापक और संवेदनशील है, इसलिए प्रारूप विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले विशेषज्ञों द्वारा इसकी विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को समिति में शामिल किया गया है।
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी समिति की अध्यक्षता
समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरियाला, सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, पश्चिम बंगाल सरकार की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष, शिक्षाविद डॉ. रत्ना भट्टाचार्य, पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्रा, कलकत्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता उस्मान गनी मलिक तथा निर्मल्य भट्टाचार्य को सदस्य बनाया गया है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना
यह निर्णय राज्य मंत्रिमंडल की 2 जुलाई 2026 को आयोजित छठी बैठक में लिया गया था। उसी निर्णय के आधार पर न्यायिक विभाग ने 10 जुलाई 2026 को अधिसूचना जारी करते हुए समिति के गठन को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया।
क्या होगा अगला कदम?
अब गठित समिति "समान नागरिक संहिता, पश्चिम बंगाल, 2026" के प्रारूप विधेयक का कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से परीक्षण करेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार विधेयक में आवश्यक संशोधन कर सकती है। इसके बाद ही इसे आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।