कोलकाता: कोलकाता में साइबर अपराधियों ने पहचान की नकल कर ठगी करने का एक नया तरीका अपनाया है। एक कारोबारी की तस्वीर WhatsApp की प्रोफाइल पिक्चर (DP) में लगाकर जालसाजों ने उनकी कंपनी के एक कर्मचारी को कथित तौर पर अपना शिकार बनाया और उससे कंपनी के बैंक खाते से ₹18 लाख एक दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए। मामला सामने आने के बाद शिकायत राज्य क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) तक पहुंची। इसके बाद शेक्सपियर सरणी थाने में ई-जीरो FIR के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अब उस बैंक खाते और पैसों के लेन-देन की कड़ी खंगाल रही है, जिसमें रकम भेजी गई थी।
WhatsApp DP देखकर कर्मचारी को नहीं हुआ शक
पुलिस के अनुसार, जालसाजों ने एक नए मोबाइल नंबर से कंपनी के एक कर्मचारी को WhatsApp पर संपर्क किया। खास बात यह थी कि उस नंबर की DP में कंपनी के मालिक की तस्वीर लगी हुई थी। मैसेज भेजने वाले ने खुद को कंपनी का मालिक बताया और कर्मचारी को तत्काल ₹18 लाख ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। कथित तौर पर कर्मचारी को बताया गया कि रकम भेजना जरूरी है। मालिक की तस्वीर DP में देखकर कर्मचारी को संदेश पर संदेह नहीं हुआ और उसने कंपनी के बैंक खाते से बताए गए खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए।
असली मालिक से संपर्क के बाद खुला राज
रकम ट्रांसफर होने के बाद जब कर्मचारी ने सामान्य प्रक्रिया के तहत असली कारोबारी से संपर्क किया, तो उन्हें इस तरह के किसी निर्देश की जानकारी नहीं थी। इसके बाद कर्मचारी को समझ आया कि जिस WhatsApp नंबर से संदेश आया था, वह उनके मालिक का नहीं था। पुलिस के मुताबिक, पैसे मिलने के बाद संबंधित बैंक खाता बंद हो गया। इसके बाद मामले की शिकायत की गई और जांच शुरू हुई। शुरुआती जांच में पता चला है कि ₹18 लाख केरल के कोच्चि स्थित एक बैंक खाते में भेजे गए थे। जांच अधिकारी अब संबंधित बैंक से संपर्क कर खाते और लेन-देन से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं।
पुलिस खंगाल रही है बैंक ट्रेल
अब जांच का मुख्य फोकस उस खाते पर है जिसमें कंपनी की रकम पहुंची। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खाते का इस्तेमाल किसने किया और रकम ट्रांसफर होने के बाद उसे कहां और कैसे निकाला या आगे भेजा गया। साथ ही, जांचकर्ता यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि साइबर अपराधियों को कारोबारी की तस्वीर और कंपनी के कर्मचारी की जानकारी कहां से मिली। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर सोशल मीडिया, कंपनी की वेबसाइट या किसी अन्य सार्वजनिक स्रोत से हासिल की गई थी। कोलकाता पुलिस पहले भी फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और पहचान की चोरी को साइबर अपराध के उभरते तरीकों में शामिल कर चुकी है। पुलिस की साइबर क्राइम शाखा के अनुसार, फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को भ्रमित करना और मैसेजिंग ऐप के जरिए ठगी करना गंभीर साइबर जोखिम हैं।
सिर्फ DP देखकर किसी की पहचान तय करना खतरनाक
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि WhatsApp की DP देखकर किसी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। किसी की तस्वीर आसानी से कॉपी करके दूसरे नंबर की DP पर लगाई जा सकती है। खासकर कंपनियों में वित्तीय लेन-देन से जुड़े कर्मचारियों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण चेतावनी है। किसी वरिष्ठ अधिकारी या मालिक के नाम से आए अचानक भुगतान संबंधी निर्देश को केवल WhatsApp संदेश या DP देखकर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
कोलकाता पुलिस की साइबर सुरक्षा सलाह
कोलकाता पुलिस अपनी साइबर जागरूकता मुहिम में लोगों को अनजान कॉल या संदेशों पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देने और संदिग्ध संपर्क को रिपोर्ट करने की सलाह देती है। पुलिस का आधिकारिक अभियान “Stop, Drop, Inform” लोगों को संदिग्ध कॉल रोकने, उसे तुरंत समाप्त करने और पुलिस को सूचना देने पर जोर देता है। किसी भी बड़े वित्तीय ट्रांसफर से पहले संबंधित अधिकारी से उसके पुराने और सत्यापित नंबर पर फोन करके पुष्टि करना बेहद जरूरी है। खासकर “तुरंत”, “इमरजेंसी” या “गोपनीय” जैसे शब्दों के साथ भेजे गए भुगतान निर्देशों को अतिरिक्त सावधानी से जांचना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो उसे तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए। कोलकाता पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के अलावा Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
कंपनियों के लिए भी बड़ा सबक
यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी के साथ हुई ठगी तक सीमित नहीं है। इसमें कारोबारी संस्थानों के लिए भी बड़ा साइबर सुरक्षा सबक है। कंपनियों को बड़े भुगतान के लिए दो-स्तरीय सत्यापन, लिखित स्वीकृति और वॉयस कॉल से पुष्टि जैसी प्रक्रियाएं अपनानी चाहिए। फिलहाल शेक्सपियर सरणी पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ₹18 लाख की ठगी के पीछे कौन लोग हैं और पैसे की अंतिम मंजिल क्या थी। जांच आगे बढ़ने के साथ साइबर जालसाजों के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।