तेजी से बदलते डिजिटल युग में स्मार्टफोन केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, रोजगार, डिजिटल भुगतान और सूचना तक पहुंच का सबसे महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। नई रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्मार्टफोन को अब विलासिता की वस्तु के बजाय देश के बुनियादी डिजिटल ढांचे का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए। आज करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन शिक्षा, दूरस्थ कार्य, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं का लाभ स्मार्टफोन के माध्यम से ही प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में इसकी उपलब्धता और वहनीयता बढ़ाना डिजिटल समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पड़ोसी देशों की कर नीति से मिल रही प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त
रिपोर्ट में भारत की तुलना वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों से करते हुए बताया गया है कि वहां स्मार्टफोन पर अपेक्षाकृत कम कर लगाए जाते हैं। कम कर भार के कारण इन देशों में उपभोक्ताओं के लिए स्मार्टफोन अधिक किफायती बनते हैं, जिससे डिजिटल उपकरणों की पहुंच तेजी से बढ़ी है। साथ ही, अनुकूल कर व्यवस्था ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग को भी प्रोत्साहित किया है। परिणामस्वरूप इन देशों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है और निवेश आकर्षित करने में भी सफलता प्राप्त की है।
अधिक कर से प्रभावित होती है डिजिटल पहुंच
रिपोर्ट के अनुसार भारत में स्मार्टफोन पर अपेक्षाकृत अधिक कर भार होने से आम उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता प्रभावित होती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, निम्न और मध्यम आय वर्ग तथा विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्मार्टफोन खरीदना कई बार चुनौती बन जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, तो स्मार्टफोन को अधिक सुलभ और किफायती बनाना आवश्यक होगा। इससे डिजिटल विभाजन कम होगा और अधिक लोग ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ सकेंगे।
करों में राहत से विनिर्माण और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि स्मार्टफोन पर कर संरचना को अधिक संतुलित बनाया जाता है, तो इसका लाभ केवल उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। इससे घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी नई गति मिल सकती है। कम लागत वाले बाजार में मांग बढ़ने से उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा, नए निवेश आएंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके साथ ही भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कर व्यवस्था विदेशी कंपनियों के लिए भी भारत को अधिक आकर्षक निवेश गंतव्य बना सकती है।
डिजिटल इंडिया अभियान को मिल सकती है नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच डिजिटल इंडिया अभियान की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। यदि अधिक से अधिक नागरिकों के हाथ में किफायती स्मार्टफोन उपलब्ध होंगे, तो डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, कृषि सेवाओं और डिजिटल उद्यमिता जैसी योजनाओं का विस्तार भी तेजी से होगा। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि स्मार्टफोन पर करों की समीक्षा केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि डिजिटल समावेशन, तकनीकी प्रगति और समावेशी विकास की दिशा में एक रणनीतिक पहल साबित हो सकती है।