नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी Employees' Provident Fund Organisation द्वारा शुरू की जाने वाली UPI के माध्यम से PF निकासी की सुविधा फिलहाल टल गई है। पहले इसे मार्च में लॉन्च किए जाने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते इसमें कम से कम एक महीने की और देरी हो गई है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि यह सुविधा मई के अंत तक शुरू हो सकती है।
नए IT सिस्टम अपग्रेड पर काम जारी
इस देरी के पीछे मुख्य कारण EPFO का बड़ा IT सिस्टम अपग्रेड है। संगठन अपने पुराने और अलग-अलग सिस्टम्स को हटाकर एक एकीकृत और आधुनिक प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। इस नए सिस्टम को CITES 2.0 नाम दिया गया है, जो पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
छह प्रमुख मॉड्यूल्स पर आधारित नई व्यवस्था
CITES 2.0 सिस्टम को छह प्रमुख मॉड्यूल्स में विकसित किया गया है, जिनमें मेंबर अकाउंट, एम्प्लॉयर फाइलिंग, क्लेम प्रोसेस, पेंशन, फाइनेंस और कंप्लायंस एवं शिकायत निवारण शामिल हैं। इनमें से पांच मॉड्यूल्स की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि परियोजना अंतिम चरण में है।
आखिरी मॉड्यूल की टेस्टिंग बनी देरी की वजह
हालांकि सिस्टम के अधिकांश हिस्से तैयार हैं, लेकिन कंप्लायंस और शिकायत निवारण से जुड़े अंतिम मॉड्यूल की टेस्टिंग अभी जारी है। जब तक यह पूरी तरह सफल नहीं हो जाता, तब तक पूरे सिस्टम को लागू करना संभव नहीं है। यही कारण है कि UPI के माध्यम से PF निकासी की सुविधा को फिलहाल टालना पड़ा है।
मई के अंत तक लॉन्च की उम्मीद
रिपोर्ट्स के अनुसार यदि अंतिम चरण की टेस्टिंग समय पर पूरी हो जाती है, तो मई के अंत तक UPI आधारित PF निकासी की सुविधा शुरू हो सकती है। यह सुविधा शुरू होने के बाद लाखों कर्मचारियों को अपने PF फंड तक तेजी और आसानी से पहुंच मिल सकेगी।
डिजिटल बदलाव से बढ़ेगी सुविधा और पारदर्शिता
नई IT व्यवस्था के लागू होने से EPFO की सेवाएं अधिक डिजिटल, तेज और उपयोगकर्ता अनुकूल हो जाएंगी। UPI के जरिए PF निकालने की सुविधा कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगी, जिससे प्रक्रिया सरल और समय की बचत करने वाली बन जाएगी।
कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव
UPI आधारित निकासी सुविधा लागू होने के बाद कर्मचारियों को लंबी प्रक्रिया और देरी से राहत मिलेगी। यह कदम डिजिटल भारत की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो वित्तीय सेवाओं को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाएगा।