भोपाल। मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन सरकार की ‘डेस्टिनेशन कैबिनेट’ अवधारणा अब जमीनी हकीकत बनती दिख रही है। मंत्रालय की सीमाओं से बाहर निकलकर सरकार सीधे खेत-खलिहानों तक पहुंच रही है। इसी कड़ी में बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कृषि केंद्रित विशेष कैबिनेट बैठक आयोजित की जा रही है, जहाँ फैसले सीधे धरातल पर लिए जाएंगे।
नागलवाड़ी में कृषि कैबिनेट: जमीन से जुड़े फैसले
खेतों के बीच होने वाली इस बैठक में कृषि, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखा गया है। सिंचाई परियोजनाओं, फसल बीमा, प्राकृतिक खेती और कृषि अवसंरचना को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जाएंगे। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है — कृषि को मजबूती, किसान को सुरक्षा और गांव को आत्मनिर्भरता।
आस्था और परंपरा से विकास का संकल्प
कैबिनेट सदस्य नागलवाड़ी स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल के दर्शन भी करेंगे। यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि परंपरा और विकास के समन्वय का प्रतीक है। आदिवासी समाज की संस्कृति, आस्था और पहचान को सम्मान देते हुए विकास की नई दिशा तय करने का संदेश भी इस पहल से जुड़ा है।
आदिवासी अंचल से समृद्धि की नई राह
डेस्टिनेशन कैबिनेट के माध्यम से आदिवासी अंचल में शिक्षा, कृषि, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष फोकस रहेगा। भील-भिलाला समाज की परंपराओं के सम्मान के साथ विकास योजनाओं को गति देने की रणनीति बनाई जा रही है। भगोरिया हाट की सांस्कृतिक भूमि से समृद्धि का संदेश पूरे प्रदेश में प्रसारित करने की तैयारी है।
श्रीअन्न और तट विकास को नई गति
बैठक में श्रीअन्न (मिलेट्स) को प्रोत्साहन देने और नर्मदा तट आधारित विकास मॉडल को सशक्त बनाने पर भी चर्चा होगी। इससे स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सुशासन का धरातलीय मॉडल
डेस्टिनेशन कैबिनेट केवल एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि सुशासन का जीवंत उदाहरण बनकर उभर रही है, जहाँ निर्णय फाइलों तक सीमित न रहकर सीधे जमीन पर लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।
Comments (0)