रायपुर। कक्षा 6वीं से विद्यार्थियों को अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। अंग्रेज़ी के साथ-साथ छात्र फ्रेंच या जर्मन जैसी विदेशी भाषा चुन सकेंगे। यह व्यवस्था Central Board of Secondary Education द्वारा 2026-27 सत्र से लागू किए जाने की तैयारी में है, जिसे नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत लागू किया जाएगा।
क्या है नई व्यवस्था?
- कक्षा 6वीं से तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य।
- अंग्रेज़ी के साथ छात्र फ्रेंच या जर्मन का विकल्प चुन सकेंगे।
- 2031 की 10वीं बोर्ड परीक्षा में इसे औपचारिक रूप से शामिल किए जाने की संभावना।
नई किताबें और तय होगा लेवल
नई नीति के तहत पाठ्यपुस्तकों का स्तर और सिलेबस भी तय किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि विद्यार्थियों की तीसरी भाषा में कितनी समझ, ज्ञान और स्किल विकसित हो रही है। मूल्यांकन प्रक्रिया भी उसी आधार पर तैयार की जाएगी।
स्किल और ग्लोबल एक्सपोज़र पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रेंच या जर्मन जैसी भाषाओं का विकल्प मिलने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पढ़ाई और करियर के अवसर मिल सकते हैं। यह कदम छात्रों की भाषाई क्षमता, कम्युनिकेशन स्किल और वैश्विक समझ को मजबूत करेगा। नई शिक्षा व्यवस्था के लागू होने के बाद स्कूलों में भाषा शिक्षकों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता भी अहम होगी।
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