रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य की जेलों में हुई बंदियों की मौत का मुद्दा गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने जानकारी दी कि जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक राज्य की केंद्रीय और जिला जेलों में कुल 66 बंदियों की कस्टोडियल डेथ दर्ज की गई है।
गृहमंत्री ने बताया कि इनमें से 18 मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में जांच प्रक्रिया अभी जारी है।
इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत को संदिग्ध बताते हुए मामले की जांच विधानसभा समिति से कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतकों के नाम और संबंधित जेलों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। साथ ही कवर्धा जेल में बंद पंकज साहू और कांकेर जेल में बंद रहे जीवन ठाकुर के मामलों को लेकर भी सवाल उठाए।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मृत्यु निर्धारित अवधि से पहले हुई थी, इसलिए वह 66 मामलों की सूची में शामिल नहीं है। वहीं जीवन ठाकुर को न्यायालय की अनुमति के बाद कांकेर से रायपुर स्थानांतरित किया गया था।
गृहमंत्री ने बताया कि जीवन ठाकुर को 12 अक्टूबर 2025 को जेल लाया गया था। वे शुगर की बीमारी से पीड़ित थे और तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां परिजन उनसे मिलते रहे। जेल प्रशासन की ओर से न्यायालय को सूचित किया गया था कि वे उपचार में सहयोग नहीं कर रहे थे। बाद में न्यायालय के निर्देश पर उनका स्थानांतरण रायपुर किया गया।
इस पर भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि कोई भी मरीज जानबूझकर अपनी स्थिति क्यों बिगाड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुलाकात की अनुमति को लेकर भी प्रतिबंध लगाए गए।
विधानसभा में इस मुद्दे पर जमकर नारेबाजी हुई और विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया।
इसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में हत्या, लूट और फिरौती जैसे गंभीर अपराधों में वृद्धि का मुद्दा भी उठाया। गृहमंत्री ने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अपराधों में कमी आई है। मामले को लेकर सदन में राजनीतिक बयानबाजी तेज रही और कस्टोडियल डेथ के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग पर जोर दिया गया।
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