रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन धान खरीदी का मुद्दा सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे टकराव का कारण बन गया। शून्यकाल के दौरान विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाकर राज्य सरकार की धान खरीदी प्रक्रिया पर चर्चा की मांग की।
विपक्ष का आरोप था कि धान खरीदी नीति पूरी तरह विफल रही है। किसानों को न समय पर टोकन मिल रहा है, न भुगतान हो रहा है और उनकी शिकायतों पर सुनवाई भी नहीं हो रही। स्थगन प्रस्ताव के जरिए तत्काल चर्चा की मांग की गई, लेकिन सभापति द्वारा प्रस्ताव नामंजूर किए जाने के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया।
नारेबाजी और टेबल थपथपाने के बीच कांग्रेस विधायक विरोध जताते हुए गर्भगृह में पहुंच गए। विधानसभा नियमों के तहत गर्भगृह में प्रवेश करने पर संबंधित सदस्यों को निलंबित कर दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया है, उनसे दोबारा खरीदी की जाए और कर्जमाफी पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
वहीं सत्तापक्ष की ओर से पलटवार करते हुए बीजेपी विधायक सुनील सोनी ने कहा कि वर्तमान सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है और यह अब तक की सबसे अधिक समर्थन मूल्य पर खरीदी है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।
सभापति ने स्पष्ट किया कि बजट सत्र के दौरान आय-व्यय पर चर्चा को प्राथमिकता दी जाएगी, इसलिए इस विषय पर तत्काल बहस की अनुमति नहीं दी गई।
धान खरीदी के मुद्दे पर सदन में हुए हंगामे, निलंबन और तीखी बयानबाजी ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। अब यह देखना होगा कि यह मुद्दा विधानसभा से निकलकर सड़क तक कितना प्रभाव डालता है।
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