प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर वर्ष 6000 रुपये तीन किस्तों में मिलते हैं। 19 नवंबर 2025 को 21वीं किस्त जारी होने के बाद अब 22वीं किस्त की तैयारी चल रही है, जो संभवतः होली से पहले जारी हो सकती है। इसी प्रक्रिया के दौरान केंद्र सरकार ने सभी लाभार्थियों के दस्तावेजों की गहन पुनः जांच शुरू कर दी। इस जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में किसानों ने आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया था। परिणामस्वरूप उनके नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए।
किन कारणों से किसानों के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं
सरकार को कई ऐसे मामले मिले जिनमें किसानों के भूमि रिकॉर्ड में स्पष्टता नहीं थी या दस्तावेज नियमों के अनुरूप नहीं थे। विशेष रूप से 01 फरवरी 2019 के बाद रजिस्टर्ड भूमि वाले किसानों के दस्तावेज फिर से जांचे जा रहे हैं। कई मामलों में स्वामित्व स्पष्ट न होने या कागजात अधूरे पाए जाने पर किसानों के नाम तुरंत सूची से काट दिए गए। सरकार का उद्देश्य योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र और छोटे किसानों तक पहुंचाना है।
परिवार संबंधी नियमों का उल्लंघन भी बड़ी वजह
PM किसान योजना के अनुसार एक परिवार, जिसमें पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे शामिल हैं, को केवल एक ही व्यक्ति को लाभ मिल सकता है। जांच में सामने आया कि कई परिवारों में पति-पत्नी दोनों ने अलग-अलग आवेदन करके किस्तें प्राप्त कीं। इसे सीधे तौर पर धोखाधड़ी माना गया है और ऐसे लाभार्थियों की किस्तें रोक दी गई हैं। सरकार पहले मिली सभी किस्तों को वापस लेने की तैयारी भी कर रही है यदि ऐसा उल्लंघन साबित होता है।
कहीं आपका नाम तो नहीं कटा? अभी ऐसे करें जांच
अगर आप इस योजना के तहत हर वर्ष मिलने वाले 6000 रुपये का लाभ ले रहे हैं, तो यह जानना बेहद आवश्यक है कि आपका नाम अब भी सूची में मौजूद है या नहीं। इसके लिए किसान अपने मोबाइल या कंप्यूटर से आधिकारिक पोर्टल पर जाकर लाभार्थियों की सूची में अपना नाम खोज सकते हैं। नाम न मिलने पर तुरंत भूमि रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार अपडेट कराना चाहिए।
किस्त मिलने से पहले जरूरी है दस्तावेजों की पूर्णता
22वीं किस्त जारी होने में अब ज्यादा समय नहीं है, ऐसे में यह सुनिश्चित कर लेना बहुत जरूरी है कि आपके सभी दस्तावेज सही, पूर्ण और अपडेटेड हों। भूमि रिकॉर्ड में मामूली गड़बड़ी भी भुगतान रोक सकती है। सरकार इस योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है, जिससे गलत तरीके से लाभ लेने वालों को बाहर किया जा सके और वास्तविक पात्र किसानों को समय पर सहायता मिल सके।
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