रायपुर। सूरजपुर जिले के शिवनंदनपुर में नगर पंचायत चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस ने प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में लगातार तीन दिन तक धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी की। आखिरकार प्रशासन के कुछ फैसलों के बाद कांग्रेस ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के कई बड़े नेता एक मंच पर नजर आए, जिससे साफ हो गया कि मामला सिर्फ स्थानीय चुनाव तक सीमित नहीं रहा बल्कि पार्टी ने इसे अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़ दिया।
भूपेश बघेल के बयान से बढ़ा सियासी पारा
धरना समाप्त होने के दौरान मंच से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी भरे अंदाज में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं और जब कांग्रेस की सरकार फिर आएगी तो सब याद रखा जाएगा।
भूपेश बघेल ने यह भी कहा कि जब दीपक बैज और टीएस सिंहदेव धरने पर बैठ गए हैं, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं।” उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है।
विकास उपाध्याय ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में अपराधियों पर कार्रवाई करने में सरकार विफल साबित हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि थानों में झूठी रिपोर्ट दर्ज कर लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। विकास उपाध्याय ने कहा कि भूपेश बघेल का बयान सही है और आज भाजपा की सरकार है, लेकिन कल कांग्रेस की सरकार भी आ सकती है। उन्होंने भाजपा के “चाल, चरित्र और चेहरे” पर भी सवाल उठाए।
बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया ‘राजनीतिक आतंक’ फैलाने का आरोप
विवाद पर भाजपा ने भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस ने अपने पांच साल के शासनकाल में प्रदेश को खौफ के माहौल में चलाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकार ने पूरे सिस्टम को डराकर काम कराने की परंपरा विकसित की थी और जनता कांग्रेस के राजनीतिक आतंकवाद से परेशान रही।
विजय शर्मा बोले- पुलिस को धमकाने से क्या हासिल होगा?
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कवर्धा मामले में उनके खिलाफ भी आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था, लेकिन उन्होंने अदालत के फैसले को स्वीकार किया।
विजय शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस पुलिस अधिकारियों को धमकाकर क्या हासिल करना चाहती है।
स्थानीय चुनाव से आगे बढ़ा राजनीतिक संघर्ष
शिवनंदनपुर का यह विवाद अब सिर्फ नगर पंचायत चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस जहां इसे सड़क पर संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश कर रही है, वहीं भाजपा कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में जुटी है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और ज्यादा गर्माहट पैदा कर सकता है।