नई दिल्ली/कोलकाता: गलत और फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी पाने वालों के खिलाफ अब सख्त जांच अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से आरक्षण, आय और जाति प्रमाणपत्रों की गहन समीक्षा शुरू कर दी गई है। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी की नौकरी तत्काल समाप्त की जा सकती है। साथ ही धोखाधड़ी साबित होने पर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने का भी प्रावधान रखा गया है।
EWS प्रमाणपत्रों की होगी गहन जांच
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी के तहत लाभ लेने वाले उम्मीदवारों के आय और संपत्ति संबंधी दावों की कड़ी जांच की जा रही है। प्रशासन उन मामलों की विशेष जांच कर रहा है, जहां गलत आय विवरण या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर EWS प्रमाणपत्र बनवाने की आशंका है। जांच में गड़बड़ी सामने आने पर न सिर्फ प्रमाणपत्र रद्द किया जा सकता है, बल्कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी शुरू हो सकती है।
जाति प्रमाणपत्रों पर बढ़ी सख्ती, मांगा जा सकता है 1950 का रिकॉर्ड
कुछ राज्यों, खासकर पश्चिम बंगाल में फर्जी जाति प्रमाणपत्र रैकेट सामने आने और अदालतों की सख्ती के बाद प्रशासन ने पिछले 10 से 15 वर्षों में जारी हुए जाति प्रमाणपत्रों की विशेष समीक्षा शुरू की है। ऐसे मामलों में संबंधित उम्मीदवारों से उनके मूल निवासी या वंशावली से जुड़े पुराने प्रमाण, जैसे 1950 या उससे पहले के राजस्व रिकॉर्ड, भूमि दस्तावेज या पारिवारिक अभिलेख पेश करने के लिए कहा जा सकता है।
SC, ST, OBC और EWS सभी श्रेणियों पर लागू नियम
नई जांच प्रक्रिया केवल एक श्रेणी तक सीमित नहीं है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग के EWS उम्मीदवारों के प्रमाणपत्रों की भी सख्ती से जांच की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे और फर्जीवाड़े पर रोक लग सके।
क्या करें उम्मीदवार?
विशेषज्ञों के मुताबिक, उम्मीदवारों और उनके परिवारों को अपने जाति, आय और आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों को अपडेट और सत्यापित रखना चाहिए। संबंधित राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, राजस्व विभाग या ई-सेवा पोर्टल पर जाकर अपने रिकॉर्ड की स्थिति समय-समय पर जांचते रहना जरूरी है।