आगामी फिल्म केडी: द डेविल के गाने ‘सरके चुनर’ को लेकर बढ़ते विवाद के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने शिकायतों के आधार पर इस गाने के कंटेंट को गंभीरता से लेते हुए कई प्रमुख संस्थाओं को नोटिस जारी किया है। यह कदम मनोरंजन सामग्री में बढ़ती अश्लीलता पर चिंता को दर्शाता है।
किन संस्थाओं को जारी हुआ नोटिस
आयोग ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गूगल इंडिया को नोटिस भेजा है। इन सभी से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है।
अश्लील और दोहरे अर्थ वाले बोलों पर आपत्ति
शिकायत में कहा गया है कि ‘सरके चुनर’ गाने के बोल अश्लील और दोहरे अर्थ वाले हैं, जो विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। टीवी, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी उपलब्धता से यह सामग्री आसानी से नाबालिगों तक पहुंच रही है, जिससे उनके मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
बच्चों के अधिकारों का मुद्दा
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह नाबालिगों के संरक्षण से जुड़े मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। आयोग का मानना है कि मुख्यधारा के मनोरंजन में इस तरह की प्रवृत्तियां युवाओं के बीच अनुचित व्यवहार और भाषा को सामान्य बना सकती हैं, जो सामाजिक दृष्टि से चिंताजनक है।
कानूनी आधार पर कार्रवाई
यह नोटिस मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा-12 के तहत जारी किया गया है। आयोग की सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तथ्यों की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
यूट्यूब से हटाया गया गाना
विवाद बढ़ने के बाद ‘सरके चुनर’ गाने को यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले ने एक बार फिर डिजिटल कंटेंट की निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और इस तरह के मामलों के लिए क्या नए दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं।
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