दुनिया में बढ़ते तापमान का असर अब आंकड़ों में और स्पष्ट दिखाई देने लगा है। यूरोपीय जलवायु वेधशाला ‘कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस’ (C3S) के अनुसार, इस साल का अगस्त 2023 के जुलाई के साथ संयुक्त रूप से अब तक का सबसे गर्म महीना दर्ज किया गया है। यह रिकॉर्ड ऐसे समय बना है, जब वैज्ञानिक लगातार वैश्विक तापमान में हो रही असामान्य वृद्धि को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।
सी3एस के मुताबिक अगस्त में वैश्विक औसत तापमान औद्योगीकरण-पूर्व अनुमानित स्तर से 1.65 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। नवंबर 2025 के बाद यह पहली बार है, जब किसी महीने का वैश्विक औसत तापमान औद्योगीकरण-पूर्व औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंचा है। यह आंकड़ा जलवायु परिवर्तन की रफ्तार को लेकर गंभीर संकेत देता है।
इंसानी गतिविधियां बढ़ा रहीं धरती की गर्मी
वैश्विक तापमान में इस तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण जीवाश्म ईंधन का लगातार इस्तेमाल माना जा रहा है। कोयला, तेल और गैस जलने से बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, जो पृथ्वी के वातावरण में गर्मी को रोकती हैं। दशकों से जारी इस प्रक्रिया ने वैश्विक तापमान को लगातार ऊपर धकेला है।
इसके अलावा उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में विकसित हो रही ‘अल नीनो’ परिस्थितियां भी तापमान बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं। प्रशांत महासागर में बढ़ती गर्मी वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करती है और पहले से गर्म हो रहे वातावरण में तापमान को और बढ़ाने का काम कर सकती है।
समुद्र की सतह भी पहुंची रिकॉर्ड ऊंचाई पर
धरती के साथ समुद्र भी असाधारण गर्मी का सामना कर रहा है। C3S के अनुसार, अगस्त में ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर औसत वैश्विक समुद्री सतह का तापमान 21.07 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह अगस्त महीने के लिए अब तक का सबसे अधिक तापमान है।
इससे पहले अगस्त 2023 में समुद्री सतह का औसत तापमान 20.98 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। नया रिकॉर्ड बताता है कि महासागर भी लगातार अतिरिक्त गर्मी सोख रहे हैं। समुद्र के बढ़ते तापमान का प्रभाव समुद्री जीवन, वर्षा चक्र, तूफानों और तटीय क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
अल नीनो ने बढ़ाई जलवायु संकट की चिंता
कॉपरनिकस ने बताया कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में मजबूत ‘अल नीनो’ विकसित हो रहा है। इस प्राकृतिक जलवायु घटना के दौरान प्रशांत महासागर के एक बड़े हिस्से में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों के लिए चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि महासागर पहले से ही मानव गतिविधियों के कारण कई दशकों से गर्म हो रहे हैं। ऐसे में अल नीनो से मिलने वाली अतिरिक्त गर्मी वैश्विक तापमान को और ऊपर ले जा सकती है तथा कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी और असामान्य मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी, भारी पड़ेगी गर्मी की कीमत
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टिल ने जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को लेकर दुनिया को गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जब तक बड़े पैमाने पर कोयला, तेल और गैस का इस्तेमाल बंद नहीं किया जाता, तब तक इनसे होने वाला प्रदूषण पृथ्वी को लगातार गर्म करता रहेगा।
उन्होंने चेताया कि अत्यधिक गर्मी के रिकॉर्ड टूटते रहेंगे और इसका सीधा असर लाखों लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। परिवहन और स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ने के साथ भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों की कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। जलवायु संकट से होने वाला आर्थिक नुकसान आने वाले समय में और बढ़ने की आशंका है।
जलवायु संकट का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी पर
बढ़ता वैश्विक तापमान केवल मौसम का आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसका असर मानव जीवन और अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों पर पड़ता है। अत्यधिक गर्मी स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ाती है, जबकि तापमान और वर्षा के बदलते स्वरूप से कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। समुद्री तापमान में वृद्धि से तटीय पारिस्थितिकी भी प्रभावित हो सकती है।
साइमन स्टिल ने कहा कि जलवायु संकट के प्रमाण अब स्पष्ट हैं और इसकी बढ़ती कीमत मानवता को चुकानी पड़ रही है। अगस्त का यह रिकॉर्ड एक बार फिर संकेत देता है कि वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेज कटौती करना बेहद जरूरी हो गया है।
1.5 डिग्री की सीमा फिर चर्चा के केंद्र में
अगस्त में वैश्विक औसत तापमान का औद्योगीकरण-पूर्व स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाना जलवायु परिवर्तन की बहस में विशेष महत्व रखता है। हालांकि किसी एक महीने का 1.5 डिग्री से ऊपर जाना दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्य के उल्लंघन के समान नहीं माना जाता, लेकिन यह पृथ्वी के लगातार गर्म होते जाने की गंभीर तस्वीर जरूर सामने रखता है।
वैज्ञानिक समुदाय लंबे समय से चेतावनी देता रहा है कि तापमान वृद्धि को सीमित करने में हर अतिरिक्त अंश का महत्व है। अगस्त का रिकॉर्ड इसी चुनौती की ओर इशारा करता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अब केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि उत्सर्जन घटाने की दिशा में ठोस और तेज कदम उठाने होंगे।