मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस को लेकर राहत भरा फैसला सामने आया है। अब यदि किसी तकनीकी परेशानी के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती है, तो इसे सीधे अनुपस्थिति मानकर वेतन रोकने की कार्रवाई नहीं की जाएगी।इस व्यवस्था का उद्देश्य तकनीकी कारणों से होने वाली परेशानी के चलते कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान से बचाना है। हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया अभी भी अनिवार्य है।
लोक शिक्षण आयुक्त ने दिए निर्देश
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों को नई व्यवस्था के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं।निर्देश मिलने के बाद जिला स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारियों ने संबंधित संकुल प्राचार्यों को भी नई व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई करने के लिए कहा है। यानी केवल ई-अटेंडेंस तकनीकी रूप से दर्ज नहीं हो पाने के आधार पर वेतन रोकने की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अतिथि शिक्षकों को भी मिलेगी राहत
नई व्यवस्था का लाभ केवल नियमित शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा। तकनीकी कारणों से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने की स्थिति में अतिथि शिक्षकों का वेतन भी केवल इसी आधार पर नहीं रोका जा सकेगा।यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए तकनीकी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है।
करीब 99 प्रतिशत शिक्षक दर्ज कर रहे ई-अटेंडेंस
विभाग के अनुसार प्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिक्षकों की भागीदारी काफी अधिक है। वर्तमान में करीब 99 प्रतिशत शिक्षक और अतिथि शिक्षक इस व्यवस्था के तहत अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं।ऐसे में तकनीकी कारणों से कभी-कभार ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाने वाले कर्मचारियों को नई व्यवस्था से राहत मिलने की उम्मीद है।
E-Attendance की अनिवार्यता अभी भी बरकरार
विभाग ने साथ ही यह स्पष्ट किया है कि ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त नहीं की गई है। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना जरूरी रहेगा।यानी तकनीकी समस्या होने पर वेतन रोकने से राहत मिलेगी, लेकिन जानबूझकर ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करने को इस छूट का आधार नहीं माना जाएगा।