चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को भारत दौरे पर आएंगे। वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की है।चीन के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग BRICS समिट में हिस्सा लेने भारत पहुंचेंगे। इससे पहले कई दिनों से उनके दिल्ली दौरे को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
करीब 7 साल बाद भारत आएंगे जिनपिंग
शी जिनपिंग का यह भारत दौरा करीब सात साल बाद हो रहा है। उनकी पिछली भारत यात्रा 11-12 अक्टूबर 2019 को हुई थी। उस दौरान वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम पहुंचे थे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत-चीन की दूसरी अनौपचारिक शिखर बैठक हुई थी।शी जिनपिंग इससे पहले भी कई मौकों पर भारत आ चुके हैं:
सितंबर 2014: पहली बार भारत दौरे पर आए और पीएम मोदी के साथ व्यापक बातचीत की।
2016: गोवा में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल हुए।
2019: मामल्लापुरम में अनौपचारिक भारत-चीन शिखर बैठक में हिस्सा लिया।
2026: करीब सात साल बाद फिर भारत दौरे पर आ रहे हैं।
PM मोदी और शी जिनपिंग के बीच होगी द्विपक्षीय बैठक
शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। जानकारी के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच भारत मंडपम में बातचीत होगी, जिसके बाद जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
शी जिनपिंग करीब 24 घंटे दिल्ली में रह सकते हैं। उनके 12 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे दिल्ली पहुंचने और 13 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे चीन के लिए रवाना होने की जानकारी सामने आई है।
BRICS समिट में पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति भी होंगे शामिल
नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे।ऐसे में BRICS के मंच पर भारत, चीन और रूस समेत प्रमुख देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी से इस सम्मेलन का वैश्विक महत्व और बढ़ गया है।
भारत-चीन संबंधों के लिहाज से अहम मुलाकात
PM मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात भारत-चीन संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आए तनाव के बीच हाल के समय में संबंधों को स्थिर करने की कोशिशें हुई हैं।BRICS सम्मेलन से पहले चीन की ओर से भी भारत-चीन संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क और संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।दिल्ली में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे एशिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच संवाद और सहयोग को लेकर भी संदेश जाएगा।
चार महाद्वीपों में फैला प्रभावशाली BRICS समूह
BRICS अब चार महाद्वीपों में फैला एक प्रभावशाली भू-राजनीतिक और आर्थिक समूह बन चुका है। नए सदस्य देशों के जुड़ने के साथ संगठन की आर्थिक, रणनीतिक और जनसांख्यिकीय ताकत में लगातार विस्तार हुआ है।2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। भारत अपनी चौथी BRICS अध्यक्षता के दौरान संगठन को अधिक समावेशी, प्रभावी और समाधान-केंद्रित मंच बनाने पर जोर दे रहा है।
BRICS में 11 सदस्य देश
वर्तमान में BRICS में कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं। इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।
इन देशों की सामूहिक हिस्सेदारी दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत GDP और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार में बताई गई है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में BRICS के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
12 सितंबर पर दुनिया की नजर
12 सितंबर को नई दिल्ली में शुरू होने वाले BRICS सम्मेलन पर वैश्विक नजरें रहेंगी। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात भारत-चीन संबंधों के भविष्य के लिहाज से अहम मानी जा रही है।चीन की ओर से जिनपिंग के भारत दौरे की आधिकारिक पुष्टि के बाद अब BRICS समिट में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी।