रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में मूंग उपार्जन से जुड़ी गड़बड़ी के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में किसानों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी पंजीयन कराकर बाजार से कम कीमत पर मूंग खरीदने और उसे सरकार को समर्थन मूल्य पर बेचने का मामला सामने आया है। इस मामले में EOW ने रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर, गौरव ठाकुर और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है। EOW की जांच के मुताबिक आरोपियों ने किसानों की ऐसी जमीनों का इस्तेमाल किया, जिनका समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया गया था। कथित तौर पर इन जमीनों को अपने या परिचितों के नाम पर पंजीकृत कर मूंग उपार्जन का लाभ लिया गया। जांच में तीन आरोपियों द्वारा करीब 13.35 लाख रुपये का अनुचित लाभ कमाने और शासन को इतनी ही राशि की आर्थिक क्षति पहुंचने की बात सामने आई है।
किसानों की जमीन के नाम पर कैसे हुआ कथित फर्जीवाड़ा?
समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए किसान को संबंधित समिति में अपनी कृषि भूमि का पंजीयन कराना होता है। EOW की जांच में सामने आया कि उपार्जन केंद्र पर काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के पास उन किसानों की जानकारी रहती थी, जिन्होंने अपनी जमीन का पंजीयन नहीं कराया था। आरोप है कि इसी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए कुछ जमीनों का पंजीयन आरोपियों ने अपने या अपने परिचितों के नाम पर करा लिया। पंजीयन पर्ची के कॉलम-5 में, जहां जमीन मालिक या कौलीदार का नाम दर्ज किया जाना था, वहां कथित तौर पर आरोपियों ने खुद को सिकमीदार के रूप में दर्ज कराया। जांच में संबंधित किसानों ने बताया कि उन्होंने न तो किसी को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी और न ही कोई कौलीनामा दिया था।
बाजार से 3 हजार रुपये से कम में मूंग खरीदने का आरोप
EOW की जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी पंजीयनों पर उपार्जन केंद्र में जो मूंग तौली गई, वह संबंधित किसानों के खेतों की उपज नहीं थी। जांच के अनुसार आरोपियों ने बाजार, व्यापारियों और बरेली मंडी से मूंग खरीदी। इन खरीदों में कई मामलों में कीमत 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम बताई गई है। जांच में संबंधित वर्षों के दौरान मंडी में मूंग की कीमत करीब 1,500 से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच होने का उल्लेख है। इसके बाद यही मूंग सरकारी उपार्जन केंद्र पर समर्थन मूल्य पर बेचे जाने का आरोप है। वर्ष 2024-25 में मूंग का समर्थन मूल्य 8,558 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि वर्ष 2025-26 में 8,682 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी जांच के मुताबिक बाजार से कम कीमत पर खरीदी गई मूंग को सरकारी खरीद व्यवस्था में कई गुना अधिक कीमत पर बेचकर अनुचित आर्थिक लाभ लिया गया।
किसानों को पता तक नहीं था कि उनकी जमीन पर हो गया पंजीयन
मामले की जांच में कुछ ऐसे उदाहरण भी सामने आए, जिनमें जमीन मालिक किसानों को कथित फर्जी पंजीयन की जानकारी ही नहीं थी। एक किसान की खसरा नंबर 160/3 की करीब डेढ़ एकड़ जमीन को किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत कर उस पर मूंग की बिक्री की गई। जांच में यह भी सामने आया कि किसान ने अपनी बाकी जमीनों का पंजीयन स्वयं कराया था, लेकिन इस खसरे का पंजीयन उसने नहीं कराया था। इसी तरह एक अन्य किसान की पत्नी और बहू के नाम दर्ज करीब ढाई एकड़ जमीन के अलग-अलग हिस्सों का पंजीयन अलग-अलग लोगों के नाम पर किए जाने की बात जांच में सामने आई। एक अन्य मामले में किसान की पत्नी के नाम दर्ज खसरा नंबर 107 की करीब पौने दो एकड़ जमीन का भी कथित तौर पर फर्जी पंजीयन कराया गया। इन पंजीयनों में दर्ज बैंक खाते भी संबंधित किसानों के नहीं पाए गए। EOW के अनुसार किसानों ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने न तो पंजीयन के लिए सहमति दी थी, न कोई कौलीनामा दिया और न ही उन्हें इस प्रक्रिया से कोई भुगतान मिला।
श्रीराम ठाकुर ने कथित तौर पर कमाई 8.60 लाख रुपये से ज्यादा
EOW की जांच में आरोपी श्रीराम ठाकुर से जुड़े दो पंजीयनों का भी उल्लेख किया गया है। पंजीयन क्रमांक 222300038017 और 222300037365 के माध्यम से उसके नाम पर क्रमशः 8.095 और 4.532 हेक्टेयर जमीन दर्ज कराई गई। इन जमीनों के आधार पर कुल 151.524 क्विंटल मूंग बेचे जाने और शासन से 13,15,531 रुपये प्राप्त करने की बात जांच में सामने आई है। EOW के मुताबिक इस मूंग को करीब 4,54,572 रुपये में खरीदा गया था। इस हिसाब से करीब 8,60,959 रुपये के लाभ की बात सामने आई।
रंजीत और गौरव ठाकुर के मामलों में भी लाखों का लाभ
जांच में आरोपी रंजीत ठाकुर के पंजीयन क्रमांक 222300064627 का भी उल्लेख है। इसके तहत 3.523 हेक्टेयर जमीन दर्ज कर 42.276 क्विंटल मूंग बेची गई। इसके बदले शासन से 3,67,040 रुपये प्राप्त हुए और जांच के मुताबिक करीब 2,40,212 रुपये का लाभ हुआ। वहीं समिति भारकच्छ कला के कंप्यूटर ऑपरेटर गौरव ठाकुर के पंजीयन क्रमांक 222300085194 में 3.428 हेक्टेयर जमीन दर्ज थी। इस पंजीयन के आधार पर 41.136 क्विंटल मूंग बेची गई और 3,57,142 रुपये प्राप्त किए गए। जांच में करीब 2,33,734 रुपये के लाभ का आकलन किया गया है। इस तरह तीनों मामलों को मिलाकर EOW ने करीब 13,34,905 रुपये के अनुचित लाभ और शासन को इतनी ही राशि की आर्थिक क्षति का प्रथम दृष्टया उल्लेख किया है।
तीन सहकारी समितियां जांच के दायरे में
शिकायत की जांच के दौरान मामला जिला सहकारी बैंक रायसेन की बाड़ी शाखा के अंतर्गत आने वाली तीन कृषक सेवा सहकारी समितियों से जुड़ा पाया गया। इनमें देहरीकला, भारकच्छ कला और गूगलवाड़ा समितियां शामिल हैं। EOW के अनुसार कथित फर्जी पंजीयन और मूंग उपार्जन की गतिविधियां 1 जुलाई 2024 से 26 जून 2025 के बीच वर्ष 2024-25 और 2025-26 के उपार्जन से संबंधित हैं।
EOW ने BNS की इन धाराओं में दर्ज की FIR
जांच में प्रथम दृष्टया अपराध के तथ्य सामने आने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल थाने में 8 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 95/2026 दर्ज किया गया। FIR में रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर, गौरव ठाकुर और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। EOW ने प्रकरण को विवेचना में लिया है। अधिकारियों के अनुसार आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले अतिरिक्त साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
मूंग उपार्जन व्यवस्था पर भी उठे सवाल
यह मामला केवल कथित आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी समर्थन मूल्य पर कृषि उपज की खरीद व्यवस्था में निगरानी से जुड़े सवाल भी खड़े करता है। किसानों के नाम और जमीन का इस्तेमाल कर यदि फर्जी पंजीयन के जरिए सरकारी खरीद का लाभ लिया गया, तो इससे वास्तविक किसानों के लिए बनाई गई व्यवस्था का दुरुपयोग होने की आशंका पैदा होती है। फिलहाल EOW की विवेचना जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।