Delhi BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर देश में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भारत अपनी वैश्विक भूमिका और बढ़ती क्षमता का प्रदर्शन करता है, तो कांग्रेस के नेता असहज हो जाते हैं। भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस साल भारत BRICS का अध्यक्ष है और उसकी अध्यक्षता की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है।
नितिन नबीन का कांग्रेस पर हमला, ‘नाराज फूफा’ वाला तंज
नितिन नबीन ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि G20 के बाद ग्लोबल AI समिट और अब BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी भारत कर रहा है, लेकिन विपक्ष को इसमें भी परेशानी दिखाई देती है। उन्होंने ‘नाराज फूफा’ वाले राजनीतिक मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब भी भारत किसी बड़े वैश्विक आयोजन की मेजबानी करता है, कांग्रेस के नेता कथित तौर पर असहज नजर आते हैं। नबीन ने कांग्रेस नेताओं के बयानों को शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेता भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और ताकत से खुश नहीं हैं।
चिदंबरम के बयान के बाद बढ़ी सियासी गर्मी
बीजेपी अध्यक्ष का यह हमला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम की BRICS को लेकर की गई टिप्पणी के बाद आया। चिदंबरम ने हाल के BRICS सम्मेलनों से भारत को मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल उठाए थे। चिदंबरम के मुताबिक उन्हें पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से कोई खास ठोस परिणाम या लाभ नजर नहीं आया। उन्होंने BRICS के अलावा भारत की SCO, G20 और QUAD में भागीदारी का जिक्र करते हुए सवाल किया कि इन बहुपक्षीय मंचों से भारत को वास्तविक फायदा कितना मिल रहा है। इसी बयान को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि विपक्ष को भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका मजबूत होने पर खुशी नहीं है।
राहुल गांधी पर भी नबीन ने साधा निशाना
नितिन नबीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं पर विदेश दौरों के दौरान भारत की छवि खराब करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जिस समय भारत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और दुनिया की नजर नई दिल्ली पर है, उस समय विपक्ष की ओर से ऐसे सवाल उठाना देश की उपलब्धियों को कमतर दिखाने जैसा है। हालांकि, कांग्रेस नेताओं की ओर से BRICS के आर्थिक और रणनीतिक लाभ को लेकर उठाए गए सवालों को भी इसी राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
‘नाराज फूफा’ शब्द का राजनीतिक इस्तेमाल क्यों चर्चा में?
‘नाराज फूफा’ वाला तंज भारतीय राजनीति में विपक्षी आलोचकों पर कटाक्ष के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अतीत में इस तरह के राजनीतिक मुहावरे का इस्तेमाल कर चुके हैं। अब BRICS सम्मेलन को लेकर नितिन नबीन के बयान में इसी शब्दावली के इस्तेमाल ने बीजेपी-कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी को और चर्चा में ला दिया है।
दिल्ली में BRICS समिट, सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम
BRICS सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों ने आयोजन स्थल, प्रमुख होटलों और प्रतिनिधियों के आवागमन वाले मार्गों को लेकर व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है। सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ केंद्रीय सुरक्षा बल और एंटी-ड्रोन सिस्टम भी शामिल हैं। सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के साथ पार्टनर देशों और अन्य आमंत्रित प्रतिनिधियों की भी भागीदारी होगी। इस दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ आर्थिक, वित्तीय और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत की चौथी BRICS अध्यक्षता, दुनिया की नजर नई दिल्ली पर
भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है। 2026 में BRICS की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं। भारत की इस साल की अध्यक्षता का जोर लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर है। सम्मेलन में BRICS के भीतर सहयोग मजबूत करने के साथ वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श होगा।
BRICS को लेकर आगे और तेज हो सकती है सियासत
BRICS सम्मेलन जैसे-जैसे करीब आ रहा है, एक तरफ भारत की कूटनीतिक भूमिका और सम्मेलन के एजेंडे पर नजर है, वहीं दूसरी तरफ इसके आर्थिक और रणनीतिक लाभ को लेकर विपक्ष के सवालों ने राजनीतिक बहस को भी गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि 12-13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन में भारत किस तरह BRICS के एजेंडे को आगे बढ़ाता है और सम्मेलन के बाद सामने आने वाले फैसले चिदंबरम जैसे विपक्षी नेताओं के उठाए सवालों का कितना जवाब देते हैं।