उत्तरप्रदेश शासन ने गुरुवार देर रात प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया। जालौन और बहराइच के जिलाधिकारियों समेत पांच IAS अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। तबादला सूची में जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, विशेष सचिव और मुख्य विकास अधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
शासन के आदेश के अनुसार जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय को बहराइच का नया जिलाधिकारी बनाया गया है। वहीं विशेष सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग समीर को जालौन का नया डीएम नियुक्त किया गया है।इसके अलावा झांसी नगर निगम की नगर आयुक्त आकांक्षा राना को विशेष सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।बाराबंकी के मुख्य विकास अधिकारी बी. सूदन को झांसी नगर निगम का नया नगर आयुक्त बनाया गया है। वहीं मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव पंकज वर्मा को बाराबंकी का मुख्य विकास अधिकारी नियुक्त किया गया है।
छह PCS अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी
IAS अधिकारियों के तबादलों के बाद शासन ने छह PCS अधिकारियों की तैनाती में भी बदलाव किया है। इनमें लखनऊ विकास प्राधिकरण, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, कानपुर नगर, गोंडा और झांसी से जुड़े अधिकारी शामिल हैं।
तबादला आदेश के मुताबिक:
सुशील प्रताप सिंह को लखनऊ विकास प्राधिकरण का सचिव बनाया गया है।
अतुल कुमार, संयुक्त सचिव लखनऊ विकास प्राधिकरण, को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का कुलसचिव और संस्कृति निदेशालय का अपर निदेशक बनाया गया है।
राजेश कुमार सिंह, SDM बदायूं, को कानपुर नगर का ADM (नागरिक आपूर्ति) नियुक्त किया गया है।
संजय कुमार सिंह, ADM गोंडा, को उप निदेशक (प्रशासन), युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल की जिम्मेदारी मिली है।
प्रमोद झा, नगर मजिस्ट्रेट झांसी, को ADM गोंडा बनाया गया है।
योगेश्वर सिंह, SDM कुशीनगर, को झांसी का नया नगर मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है।
विधानसभा चुनाव से पहले EVM की तैयारियां तेज
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनावी तैयारियों का काम भी आगे बढ़ रहा है। EVM की First Level Checking (FLC) को लेकर प्रदेश के जिलों में प्रक्रिया जारी है।जानकारी के मुताबिक, 21 जिलों में EVM की प्रथम स्तरीय जांच का पहला चरण पूरा हो चुका है। अब बाकी 54 जिलों में FLC की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों और उप जिला निर्वाचन अधिकारियों को EVM की जांच की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और चुनाव आयोग द्वारा तय मानकों की जानकारी दी जा रही है।
वाराणसी में छह मंडलों के अधिकारियों की कार्यशाला
शुक्रवार को वाराणसी में छह मंडलों वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, गोरखपुर और बस्ती के संबंधित जिलों के अधिकारियों के लिए कार्यशाला आयोजित की जाएगी।इस कार्यशाला में EVM की प्रथम स्तरीय जांच की पूरी प्रक्रिया, तकनीकी मानकों और जरूरी सावधानियों के बारे में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। EVM निर्माता कंपनी Bharat Electronics Limited (BEL) के इंजीनियर भी अधिकारियों को तकनीकी जानकारी देंगे।इसके बाद 14 सितंबर को लखनऊ में सात मंडलों लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, मुरादाबाद, देवीपाटन और अयोध्या के जिलों के अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
चुनाव से पहले EVM जांच क्यों जरूरी?
विधानसभा चुनाव से पहले EVM की First Level Checking चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा है। इस प्रक्रिया में मशीनों की तकनीकी स्थिति और उनकी कार्यक्षमता की जांच की जाती है।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव में इस्तेमाल होने वाली EVM निर्धारित तकनीकी और चुनाव आयोग के मानकों के अनुरूप हों। इसी वजह से चुनाव से पहले FLC की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण तैयारियों में शामिल किया जाता है।