चंडीगढ़: पंजाब में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई जिलों में मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जालंधर में 85 वर्षीय बुजुर्ग की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है, जबकि मोगा में भी एक मरीज की मौत की जानकारी सामने आई है। जालंधर में एक मौत के अलावा अब तक 13 संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा मामले लुधियाना में सामने आए हैं। यहां अब तक 35 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। हालांकि, इनमें आधे से ज्यादा मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और जिले में अभी तक स्वाइन फ्लू से किसी मौत की सूचना नहीं है।
लुधियाना में सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज
जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो लुधियाना में 35 मामले सामने आ चुके हैं। राहत की बात यह है कि आधे से अधिक मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। अमृतसर में साल की शुरुआत से अब तक 25 मामले सामने आए हैं। इनमें से पांच मरीज फिलहाल सक्रिय बताए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों की निगरानी और उपचार की व्यवस्था की जा रही है।
मालवा क्षेत्र के इन जिलों में भी मिले केस
मालवा क्षेत्र में भी स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आए हैं। मोगा में छह, फरीदकोट में तीन और बठिंडा व फाजिल्का में दो-दो संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं फिरोजपुर, श्री मुक्तसर साहिब, फतेहगढ़ साहिब, कपूरथला, मानसा, गुरदासपुर, तरनतारन, बरनाला और होशियारपुर में फिलहाल कोई सक्रिय मामला नहीं बताया गया है।
अस्पतालों की तैयारियों पर उठे सवाल
स्वाइन फ्लू के मामलों के बीच सरकारी अस्पतालों की तैयारियों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कपूरथला और गुरदासपुर के सिविल अस्पतालों में वेंटिलेटर उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें संचालित करने के लिए तकनीकी स्टाफ की कमी बताई जा रही है। वहीं अमृतसर में उपलब्ध 20 वेंटिलेटरों में से चार के खराब होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ने पर अस्पतालों की क्षमता को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सरकारी अस्पतालों में टेमीफ्लू का स्टॉक
हालांकि, स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक राहत की बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में टेमीफ्लू की गोलियों और सिरप का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध बताया गया है। मरीजों की निगरानी के लिए अस्पतालों में अलग वार्ड भी बनाए गए हैं।
निगेटिव रिपोर्ट के बाद भी हो सकते हैं फ्लू जैसे लक्षण
विशेषज्ञ डॉ. मनदीप सिंह के अनुसार, किसी मरीज की स्वाइन फ्लू जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बावजूद उसमें फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। संक्रमण के शुरुआती चरण में वायरस की मात्रा कम होने या सही समय और तरीके से सैंपल नहीं लिए जाने पर टेस्ट का परिणाम निगेटिव आ सकता है। हालांकि, बुखार, खांसी, गले में खराश और जुकाम हमेशा स्वाइन फ्लू के कारण ही हों, यह जरूरी नहीं है। ऐसे लक्षण सामान्य फ्लू, RSV, डेंगू या मलेरिया जैसी अन्य बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
स्वाइन फ्लू में अलग-अलग मरीजों में लक्षणों की गंभीरता अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर इनमें शामिल हैं:
- तेज बुखार: अचानक बुखार के साथ ठंड लगना और सिरदर्द।
- खांसी और गले में खराश: लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी।
- सांस लेने में परेशानी: सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत।
- शरीर में दर्द: मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द के साथ अत्यधिक थकान।
- नाक संबंधी समस्या: नाक बहना या नाक बंद होना।
- पाचन संबंधी लक्षण: कुछ मामलों में उल्टी, दस्त या पेट में ऐंठन भी हो सकती है।
स्वाइन फ्लू से बचाव कैसे करें?
- स्वाइन फ्लू समेत श्वसन संक्रमण से बचाव के लिए कुछ सामान्य सावधानियां मददगार हो सकती हैं।
- हाथ साफ रखें: साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं। जरूरत पड़ने पर अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- भीड़ में मास्क पहनें: भीड़भाड़ या खराब वेंटिलेशन वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
- चेहरे को बार-बार न छुएं: बिना हाथ साफ किए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
- बीमार होने पर घर पर रहें: फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें और डॉक्टर की सलाह लें।
- फ्लू वैक्सीन पर डॉक्टर से सलाह लें: जरूरत और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर से फ्लू टीकाकरण के बारे में सलाह ली जा सकती है।
- पौष्टिक आहार और पर्याप्त नींद: पर्याप्त पानी पिएं, संतुलित भोजन लें और शरीर को पर्याप्त आराम दें।
महत्वपूर्ण: बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या लक्षण लगातार बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें। स्वाइन फ्लू की पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच से की जानी चाहिए। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, इसे डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें।