इंदौर, 11 सितंबर 2026 | मध्यप्रदेश में बस और सार्वजनिक यात्री परिवहन की तस्वीर बदलने के लिए आज से इंदौर में बड़ा मंथन शुरू हो रहा है। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 11 और 12 सितंबर को ‘यात्री परिवहन विजन समिट 2026’ आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे, जबकि परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। दो दिन की समिट का मुख्य फोकस मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना पर रहेगा। इसके तहत प्रदेश में बस संचालन को PPP यानी Public-Private Partnership मॉडल से मजबूत करने, नई तकनीक जोड़ने और शहर से गांव तक भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क विकसित करने की रूपरेखा पर चर्चा होगी।
10,682 बसें, 3,462 रूट और 7 ऑपरेशनल रीजन का प्लान
समिट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत भविष्य में 10,682 बसें, 3,462 यात्री रूट और 7 ऑपरेशनल रीजन विकसित करने की परिकल्पना है योजना को दो चरणों में PPP मॉडल के जरिए लागू करने की तैयारी है। इसमें इंटरसिटी और इंटरस्टेट नेटवर्क को भी शामिल किया गया है। यानी सरकार का लक्ष्य केवल बड़े शहरों के बीच बस चलाना नहीं, बल्कि छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों को भी एक संगठित नेटवर्क से जोड़ना है।
Bus Operators से Investors तक एक मंच पर
समिट में निजी बस ऑपरेटर, नीति निर्माता, परिवहन विभाग और प्राधिकरणों के अधिकारी, बस निर्माता, Mobility Technology कंपनियां, निवेशक, वित्तीय संस्थान और Infrastructure Developers शामिल होंगे। इसके अलावा Urban Local Bodies, Smart City अधिकारी, Startups, Research Institutions और अंतरराष्ट्रीय विकास संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि भी सार्वजनिक परिवहन के नए मॉडल पर चर्चा करेंगे।
इन 6 मुद्दों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
यात्री परिवहन विजन समिट में छह प्रमुख विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। पहला फोकस PPP आधारित Mobility Transformation पर होगा, जिसमें निवेश, जोखिम साझा करने और बस संचालन के नए मॉडल पर चर्चा होगी। दूसरा विषय Digital Mobility और Intelligent Transport Management System है। इसमें AI आधारित route planning, real-time passenger information और integrated command systems जैसे विकल्पों पर मंथन होगा। इसके अलावा Financial Sustainability, Green & Clean Mobility, Integrated Ticketing/Mobility-as-a-Service और बेहतर Passenger Experience समिट के प्रमुख विषय होंगे।
AI बताएगा किस रूट पर कितनी बस की जरूरत
समिट में सार्वजनिक परिवहन में Artificial Intelligence और Data Analytics के इस्तेमाल पर भी विशेष चर्चा होगी। Real-time data और AI की मदद से यह पता लगाने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है कि किस रूट पर यात्रियों का दबाव ज्यादा है, किस समय ज्यादा बसें चाहिए और किन रूटों को बदलने या जोड़ने की जरूरत है। इससे बसों की scheduling और route rationalisation को ज्यादा डेटा आधारित बनाने पर जोर रहेगा।
Electric और Hydrogen Bus पर भी मंथन
प्रदेश के भविष्य के सार्वजनिक परिवहन में Clean Mobility एक बड़ा हिस्सा होगा। समिट में Electric Bus, Hydrogen Mobility और Charging Infrastructure जैसे विषयों पर उद्योग जगत और सरकार के बीच चर्चा होगी। इसका उद्देश्य ऐसी परिवहन व्यवस्था की तरफ बढ़ना है जिसमें प्रदूषण कम हो और संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ रहे।
एक टिकट से Bus-Metro-Rail तक सफर का विजन
Integrated Ticketing भी समिट का अहम विषय है। भविष्य में National Common Mobility Card और डिजिटल भुगतान जैसी तकनीकों के जरिए Bus, Metro, Rail, Parking और अन्य Mobility Services को एक ही payment ecosystem से जोड़ने की संभावनाओं पर मंथन होगा। यह व्यवस्था लागू होने पर यात्रियों को अलग-अलग सेवाओं के लिए बार-बार अलग टिकट या payment system इस्तेमाल करने की जरूरत कम हो सकती है।
Industry के लिए 12 बड़े अवसर
समिट में उद्योग जगत को 12 High-Impact Mobility Verticals में संभावनाएं दिखाई जाएंगी। इनमें Bus Manufacturing, Electric Mobility, Hydrogen Mobility, Intelligent Transport Systems, Digital Ticketing, Fleet Management, Charging Infrastructure, AI & Analytics, Smart Bus Stops, Passenger Information Systems, Mobility-as-a-Service और Transport Finance शामिल हैं।
Summit से निकलेंगे ये 7 बड़े परिणाम
आयोजकों ने समिट से सात प्रमुख outcomes तय किए हैं। इनमें Mobility Vision 2030 का Strategic Roadmap, Transport PPP को गति देना, Digital-First Mobility Framework बनाना, Financial Sustainability की कार्ययोजना, Clean Mobility को प्राथमिकता, Pilot Projects और Investment Opportunities तैयार करना तथा Government-Industry Collaboration मजबूत करना शामिल है। यानी समिट सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सरकार भविष्य की नीतियों, निवेश और पायलट प्रोजेक्ट के लिए ठोस दिशा तैयार करना चाहती है।
यात्रियों को क्या फायदा हो सकता है?
अगर प्रस्तावित मॉडल सफलतापूर्वक जमीन पर उतरता है तो शहरों के साथ कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की उपलब्धता बढ़ सकती है। Real-time tracking, डिजिटल टिकटिंग, बेहतर बस स्टॉप, ज्यादा नियमित टाइमिंग और साफ-सुथरी बस सेवा जैसे बदलाव यात्रियों के अनुभव को बेहतर बना सकते हैं। सरकार का विजन सार्वजनिक परिवहन को Connected, Sustainable, Citizen-Centric, Digitally Enabled और Financially Viable बनाना है।
इंदौर क्यों बना Summit का केंद्र?
इंदौर पहले से ही बस, BRTS और अब Metro जैसे अलग-अलग सार्वजनिक परिवहन विकल्पों पर काम करने वाले शहरों में शामिल है। इसी कारण यहां होने वाली समिट में प्रदेश के बाकी हिस्सों के लिए भी नए mobility models पर चर्चा होगी। समिट का आयोजन मध्यप्रदेश परिवहन विभाग की मेजबानी में, MP Yatri Parivahan and Infrastructure Limited के सहयोग से और Elets Technomedia द्वारा किया जा रहा है।