भारतीय रेलवे की स्वदेशी विनिर्माण क्षमता अब अंतरराष्ट्रीय रेल बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत कर रही है। पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में बांग्लादेश रेलवे के लिए तैयार की गई 19 एलएचबी ब्रॉडगेज यात्री कोचों वाली पहली रेक का रोलआउट किया जा रहा है। यह परियोजना भारत की डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता को पड़ोसी देशों की रेल जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह आपूर्ति केवल रेल डिब्बों के निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय रेल उद्योग की उस क्षमता का भी प्रदर्शन हो रहा है जिसमें किसी दूसरे देश की परिचालन परिस्थितियों के अनुसार उत्पाद में तकनीकी बदलाव किए जा सकते हैं। बांग्लादेश रेलवे के लिए तैयार किए गए इन कोचों में यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा, विद्युत प्रणाली और स्थानीय परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई विशिष्ट प्रावधान किए गए हैं।
पहली रेक में अलग-अलग श्रेणी के 19 कोच शामिल
पहली रेक में कुल 19 कोच शामिल हैं, जिनमें तीन एसी स्लीपर, तीन एसी चेयर कार, 11 गैर-एसी चेयर कार और दो पावर कार हैं। अलग-अलग श्रेणी के इन कोचों को इस तरह तैयार किया गया है कि लंबी दूरी के यात्रियों के साथ-साथ सामान्य श्रेणी के यात्रियों की जरूरतों को भी पूरा किया जा सके। एलएचबी तकनीक के कारण इन कोचों को पुराने पारंपरिक कोचों की तुलना में अधिक आधुनिक और उच्च गति परिचालन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
बांग्लादेश रेलवे की विशिष्ट परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोचों के डिजाइन में कई बदलाव किए गए हैं। इसका अर्थ यह है कि भारत ने केवल पहले से मौजूद डिजाइन के आधार पर कोच तैयार नहीं किए, बल्कि संबंधित देश की वास्तविक जरूरतों को समझकर इंजीनियरिंग समाधान विकसित किए हैं। यही पहल इस परियोजना को सामान्य निर्यात आदेश से अलग महत्व देती है और भारतीय रेल विनिर्माण क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता को सामने लाती है।
200 कोचों का बड़ा आदेश, दिसंबर 2027 तक चलेगी आपूर्ति
बांग्लादेश रेलवे ने वर्ष 2024 में राइट्स के माध्यम से कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री को 200 ब्रॉडगेज यात्री कोचों के निर्माण और आपूर्ति का आदेश दिया था। इन कोचों को सात अलग-अलग संस्करणों में तैयार किया जाना है। उपलब्ध योजना के अनुसार इनकी आपूर्ति जून 2026 से दिसंबर 2027 के बीच चरणबद्ध तरीके से बांग्लादेश को की जानी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच रेल सहयोग का इतिहास भी करीब एक दशक पुराना है। वर्ष 2015-16 में कपूरथला से बांग्लादेश को 120 एलएचबी ब्रॉडगेज यात्री कोचों की आपूर्ति की जा चुकी है। नए आदेश को उसी सहयोग के अगले चरण के रूप में देखा जा सकता है। दोनों देशों के बीच रेल संपर्क और परिवहन सहयोग क्षेत्रीय व्यापार तथा यात्रियों की आवाजाही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा है।
बांग्लादेश के यात्रियों के लिए बदला गया डिजाइन
इन कोचों को बांग्लादेश के यात्रियों की सुविधा और स्थानीय यात्रा व्यवहार को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। सीटों को पीछे की ओर झुकाने की सुविधा दी गई है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा के दौरान यात्रियों को अपेक्षाकृत बेहतर आराम मिल सके। सीटों में स्टेनलेस स्टील के आर्मरेस्ट और फुटरेस्ट लगाए गए हैं तथा उन्हें कई स्तरों तक पीछे झुकाया जा सकता है।
एसी कोचों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए पंखे, एकीकृत सीसीटीवी निगरानी प्रणाली और यात्री अलार्म प्रणाली जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। आंशिक रूप से खुलने वाली खिड़कियां, शिशु देखभाल कक्ष और प्रार्थना कक्ष जैसी व्यवस्थाएं भी कोचों की उपयोगिता को स्थानीय सामाजिक जरूरतों के अनुरूप बनाती हैं। इस तरह कोच निर्माण में केवल तकनीकी मानकों के बजाय यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को भी महत्व दिया गया है।
छत को भी बनाया गया अधिक मजबूत
बांग्लादेश की कुछ विशिष्ट परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन कोचों की छत को भी अतिरिक्त मजबूती दी गई है। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति में अतिरिक्त भार को सहन करना है जब अत्यधिक भीड़ या परिचालन परिस्थितियों के कारण यात्री कोच की छत पर चढ़ जाएं। यह बदलाव स्थानीय परिस्थितियों की व्यावहारिक समझ और डिजाइन में उसके समावेश का उदाहरण है।
रेलवे कोच के निर्माण में इस तरह के बदलाव सामान्य डिजाइन में मामूली परिवर्तन नहीं होते। इनके लिए संरचनात्मक मजबूती, भार क्षमता और सुरक्षा मानकों का दोबारा परीक्षण करना पड़ता है। बांग्लादेश के लिए तैयार किए गए इन कोचों में इसी वजह से भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता का एक ऐसा रूप दिखाई देता है जिसमें निर्यात किए जाने वाले उत्पाद को खरीदार देश की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया गया है।
टक्कर की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष जोर
इन कोचों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक उनका क्रैश-रेजिस्टेंट डिजाइन है। इन्हें यूरोपीय मानक ईएन-15227 के अनुरूप सुरक्षा प्रावधानों के साथ तैयार किया गया है। इसके लिए पूरे कोच बॉडी शेल के डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए गए हैं, ताकि टक्कर जैसी गंभीर स्थिति में संरचना यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर ढंग से बनाए रख सके।
आधुनिक रेल परिवहन में दुर्घटना की स्थिति में केवल ट्रेन की परिचालन क्षमता ही नहीं, बल्कि यात्रियों के जीवित बचने की संभावना बढ़ाना भी डिजाइन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसी दृष्टि से क्रैश-रेजिस्टेंट संरचना को महत्व दिया गया है। भारतीय रेल विनिर्माण में विकसित एलएचबी आधारित तकनीक को स्थानीय जरूरतों के साथ जोड़कर बांग्लादेश के लिए तैयार किए गए इन कोचों में सुरक्षा को प्रमुख डिजाइन प्राथमिकता बनाया गया है।
विद्युत प्रणाली भी बांग्लादेश की जरूरत के अनुसार
इन कोचों की विद्युत प्रणाली में भी भारतीय रेलवे के पारंपरिक विन्यास से अलग बदलाव किया गया है। बांग्लादेश रेलवे की परिचालन जरूरतों के अनुरूप इनमें 415 वोल्ट की विद्युत व्यवस्था रखी गई है, जबकि भारतीय रेलवे के पारंपरिक कोचों में सामान्यतः 750 वोल्ट की व्यवस्था का उपयोग होता है। यह बदलाव दिखाता है कि निर्यात के लिए तैयार किए जा रहे कोचों में स्थानीय रेल प्रणाली के साथ तकनीकी अनुकूलता को प्राथमिकता दी गई है।
भारत के लिए यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रेल कोच निर्माण की घरेलू क्षमता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार मिलने की संभावना मजबूत होती है। बांग्लादेश के लिए यह आधुनिक यात्री कोचों की उपलब्धता बढ़ाने वाला कदम है, जबकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रेल सहयोग को नई तकनीकी मजबूती मिलती है। कपूरथला से निकलने वाली यह पहली रेक इसी व्यापक साझेदारी और भारतीय रेल विनिर्माण की बढ़ती वैश्विक क्षमता का नया उदाहरण बन रही है।