चेन्नई - अगर आपके घर में कुत्ता या बिल्ली जैसा पालतू जानवर है, तो उसकी देखभाल के साथ अब उसके रजिस्ट्रेशन और सार्वजनिक जगहों पर व्यवहार को लेकर भी सतर्क रहना होगा। ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने लाइसेंस प्राप्त पालतू जानवरों को सड़कों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर छोड़ने वाले मालिकों पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। निगम का कहना है कि यह कदम पालतू जानवरों को लावारिस छोड़ने की शिकायतों को रोकने के लिए उठाया गया है।
लाइसेंस के बाद भी नहीं छोड़ सकेंगे जानवर
नगर निगम के सामने लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही थीं कि कुछ लोग अपने पालतू कुत्तों और बिल्लियों का रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद उन्हें सार्वजनिक जगहों पर छोड़ देते हैं। ऐसे मामलों में जानवर सड़क पर घूमते हुए पाए जाते हैं और उनकी वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी समस्या पर नियंत्रण के लिए निगम ने स्पष्ट किया है कि पालतू जानवर का लाइसेंस बनवाना उसकी जिम्मेदारी से मुक्त होने का रास्ता नहीं है। मालिक को अपने जानवर की उचित देखभाल और निगरानी करनी होगी।
माइक्रोचिप से होगी मालिक की पहचान
GCC की पेट लाइसेंसिंग व्यवस्था में माइक्रोचिप को भी शामिल किया गया है। लाइसेंस प्राप्त पालतू जानवरों में लगाई जाने वाली इस चिप को उसके मालिक की जानकारी से जोड़ा जाता है। माइक्रोचिप में मालिक का नाम और पता जैसी जानकारी के साथ पालतू जानवर के एंटी-रेबीज टीकाकरण से संबंधित रिकॉर्ड भी दर्ज किया जाता है। ऐसे में अगर कोई रजिस्टर्ड कुत्ता या बिल्ली सड़क पर लावारिस हालत में मिलता है, तो उसकी पहचान के जरिए मालिक तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
78 हजार से ज्यादा पेट मालिकों को लाइसेंस
चेन्नई शहर की सीमा में पालतू जानवर रखने वाले लोगों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य बताया गया है। यह व्यवस्था Urban Local Bodies Act, 1998 की धारा 292 और वर्ष 2023 में बनाए गए संबंधित नियमों के तहत लागू है। GCC ने ऑनलाइन पेट लाइसेंसिंग सिस्टम की शुरुआत अक्टूबर 2025 में की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुलाई 2026 तक निगम की ओर से 78,232 पालतू जानवरों के मालिकों को लाइसेंस जारी किए जा चुके थे।
नियम तोड़ा तो देना होगा 25 हजार रुपये
निगम की ओर से लागू किए गए नए प्रावधान के तहत लाइसेंस प्राप्त कुत्ते या बिल्ली को जानबूझकर सड़क या किसी सार्वजनिक स्थान पर छोड़ने वाले मालिक पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। माइक्रोचिप और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था का उद्देश्य पालतू जानवर को उसके मालिक से जोड़कर रखना है। इससे निगम के पास यह पता लगाने का माध्यम रहता है कि सड़क पर मिला रजिस्टर्ड जानवर किसके नाम पर दर्ज है। इस व्यवस्था के जरिए निगम पालतू जानवरों के नियमित टीकाकरण पर भी नजर रखने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में चेन्नई में पेट रखने वाले लोगों के लिए लाइसेंस माइक्रोचिप और जानवर की जिम्मेदार देखभाल से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होगा।