नई दिल्ली. 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले विश्वभर में योग के प्रति उत्साह चरम पर दिखाई दे रहा है। विभिन्न देशों में आयोजित हो रहे कार्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि योग अब केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि वैश्विक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए योग को अपनाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में भारत के मित्र देशों रूस और नेपाल में आयोजित विशेष कार्यक्रमों ने योग की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को एक नई मजबूती प्रदान की है।
रूसी दूतावास में आयोजित हुआ विशेष योग सत्र
नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और योगाभ्यास के माध्यम से शारीरिक तथा मानसिक संतुलन का अनुभव किया। कार्यक्रम के दौरान रूसी प्रतिनिधियों ने योग को भारत द्वारा विश्व को दिया गया एक अनमोल उपहार बताया। योग के प्रति सम्मान और उत्साह ने यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानवीय और आध्यात्मिक मूल्यों से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।
रूस में लगातार बढ़ रही है योग की लोकप्रियता
रूसी दूतावास की संस्कृति मामलों की काउंसलर यूलिया आर्याएवा ने कहा कि रूस में योग के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और अन्य प्रमुख शहरों में हजारों लोग नियमित रूप से योग का अभ्यास कर रहे हैं। केवल शारीरिक फिटनेस ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और जीवन संतुलन के लिए भी योग को अपनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अनेक रूसी नागरिक योग के वास्तविक दर्शन और उसकी गहराई को समझने के लिए भारत की यात्रा करते हैं, जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध और अधिक सशक्त हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल को मिला वैश्विक सम्मान
कार्यक्रम के दौरान रूस में भारत के राजदूत की धर्मपत्नी डायना अलीपोवा ने योग को शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली अद्भुत विधा बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष सराहना करते हुए कहा कि योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों के कारण आज योग दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा है और करोड़ों लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
नेपाल सहित अनेक देशों में भी योग उत्सवों की धूम
रूस के अलावा नेपाल समेत कई अन्य देशों में भी योग दिवस से पहले विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों द्वारा योग शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन और प्राकृतिक जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक बनाना है। योग के माध्यम से विश्व शांति, स्वास्थ्य और मानव कल्याण का संदेश भी व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जा रहा है।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति बन चुका है योग
योग आज भारत की सबसे प्रभावशाली सांस्कृतिक पहचान के रूप में उभरकर सामने आया है। यह केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और सकारात्मक बनाने की समग्र प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से भारत ने विश्व समुदाय को स्वास्थ्य और आत्मिक विकास का ऐसा मार्ग प्रदान किया है, जो आधुनिक जीवन की चुनौतियों के बीच नई आशा का स्रोत बन रहा है। रूस और नेपाल में आयोजित कार्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि योग की यह यात्रा निरंतर विस्तार पा रही है और भारत की सांस्कृतिक विरासत पूरी दुनिया को जोड़ने का माध्यम बन रही है।