नई दिल्ली. हाल के दिनों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश की कई प्रमुख पेय कंपनियों को नोटिस जारी कर अपने उत्पादों की लेबलिंग को लेकर जवाब मांगा है। प्राधिकरण का कहना है कि कुछ उत्पादों पर "एनर्जी ड्रिंक" शब्द का उपयोग उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि पेय स्वास्थ्यवर्धक ऊर्जा प्रदान करता है। नियामक संस्था चाहती है कि उत्पादों की लेबलिंग वैज्ञानिक तथ्यों और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो, ताकि उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी मिल सके। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह प्रश्न उठने लगा है कि क्या वास्तव में एनर्जी ड्रिंक्स शरीर को लाभ पहुंचाती हैं या फिर इनके दुष्प्रभाव अधिक गंभीर हैं।
क्या सचमुच शरीर को ऊर्जा देती हैं एनर्जी ड्रिंक्स?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश एनर्जी ड्रिंक्स शरीर को वास्तविक पोषण आधारित ऊर्जा नहीं देतीं, बल्कि इनमें मौजूद कैफीन, चीनी और अन्य उत्तेजक तत्व कुछ समय के लिए मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर सतर्कता का अनुभव कराते हैं। इस कारण व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए थकान कम महसूस होती है और ऊर्जा बढ़ने का आभास होता है। हालांकि यह प्रभाव अस्थायी होता है और कुछ समय बाद शरीर पहले से अधिक थकान महसूस कर सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम से मिलने वाली ऊर्जा ही शरीर के लिए दीर्घकालिक और सुरक्षित मानी जाती है।
कैफीन की मात्रा क्यों बनी सबसे बड़ी चिंता?
एफएसएसएआई के पूर्व निदेशक प्रदीप चक्रवर्ती के अनुसार जब देश में कैफीन युक्त पेयों के लिए मानक तैयार किए गए थे, तब विशेषज्ञ समिति ने इनके सुरक्षा पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया था। प्रारंभिक सिफारिशों के बाद वैज्ञानिक पैनल ने कैफीन की अधिकतम सीमा 300 मिलीग्राम प्रति लीटर निर्धारित की, ताकि अत्यधिक सेवन से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों को रोका जा सके। साथ ही उत्पादों पर स्पष्ट चेतावनी देने का भी प्रावधान किया गया कि एक दिन में 500 मिलीलीटर से अधिक ऐसे पेयों का सेवन न किया जाए। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों तथा कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई है।
हृदय, मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों पर क्या पड़ सकता है असर?
वैज्ञानिक शोधों में एनर्जी ड्रिंक्स के अत्यधिक सेवन को कई स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़कर देखा गया है। चिकित्सा शोध पत्रिका पबमेड में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार अधिक मात्रा में कैफीन और चीनी का सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है, हृदय की धड़कन असामान्य रूप से तेज कर सकता है और कुछ मामलों में हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है। लगातार अधिक सेवन करने वालों में अनिद्रा, बेचैनी, घबराहट, मोटापा, दांतों की क्षति और टाइप-2 मधुमेह जैसी समस्याओं की संभावना भी बढ़ सकती है। कुछ शोधों में गंभीर परिस्थितियों में तीव्र गुर्दा क्षति, दौरे, स्ट्रोक तथा अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि इनका जोखिम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, सेवन की मात्रा और अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
युवा वर्ग में तेजी से बढ़ रही है इसकी लोकप्रियता
पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थियों, युवा पेशेवरों और देर रात तक काम करने वाले लोगों के बीच एनर्जी ड्रिंक्स का चलन तेजी से बढ़ा है। कई लोग पढ़ाई, खेल, कार्यालयी कार्य या पार्टी के दौरान अधिक सक्रिय रहने के लिए इनका सेवन करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कैफीन और अधिक चीनी वाले पेयों का सेवन धीरे-धीरे आदत का रूप ले सकता है। इसका कारण यह है कि कैफीन और शर्करा मस्तिष्क में डोपामिन के स्तर को प्रभावित करते हैं, जिससे व्यक्ति बार-बार ऐसे पेयों का सेवन करने की इच्छा महसूस कर सकता है। यही वजह है कि बच्चों और किशोरों में इनके अनियंत्रित उपयोग को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं।
सुरक्षित विकल्प क्या हो सकते हैं?
पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है तो सबसे पहले जीवनशैली और आहार पर ध्यान देना चाहिए। पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, मौसमी फल, मेवे, पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, छाछ और प्राकृतिक पेय शरीर को अधिक सुरक्षित और स्थायी ऊर्जा प्रदान करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार थकान बनी रहती है तो केवल एनर्जी ड्रिंक्स पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना अधिक उचित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कैफीन युक्त पेय का सेवन सीमित मात्रा में और स्वास्थ्य संबंधी सलाह को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए, ताकि संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके।