बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होना और मस्तिष्क की कार्यक्षमता में गिरावट एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसके बीच एक सकारात्मक उम्मीद दिखाई है। क्योटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन बुजुर्गों ने 70 वर्ष की आयु के बाद भी कोई वाद्य यंत्र सीखना शुरू किया और तीन वर्ष से अधिक समय तक उसका नियमित अभ्यास जारी रखा, उनकी स्मरण शक्ति बेहतर बनी रही। वहीं जिन्होंने अभ्यास बीच में छोड़ दिया, उनमें मानसिक क्षमताओं में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट दर्ज की गई।
73 वर्ष की औसत आयु में शुरू हुआ था अध्ययन
यह शोध उन प्रतिभागियों पर आधारित था जिन्होंने वर्ष 2020 में आयोजित एक अध्ययन के दौरान औसतन 73 वर्ष की आयु में पहली बार कोई वाद्य यंत्र सीखना शुरू किया था। शुरुआती चार महीनों तक सभी प्रतिभागियों ने संगीत का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद लगभग आधे लोगों ने अगले तीन वर्षों से अधिक समय तक नियमित अभ्यास जारी रखा, जबकि बाकी प्रतिभागियों ने संगीत छोड़कर अन्य शौक अपना लिए। शोधकर्ताओं ने चार वर्ष बाद सभी प्रतिभागियों का दोबारा मूल्यांकन किया ताकि लंबे समय तक संगीत अभ्यास के प्रभावों को समझा जा सके।
MRI स्कैन में दिखा मस्तिष्क का बड़ा अंतर
चार वर्षों बाद प्रतिभागियों की एमआरआई स्कैनिंग और याददाश्त से जुड़े परीक्षण किए गए। परिणामों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। जिन लोगों ने वाद्य यंत्र बजाना जारी रखा, उनकी स्मरण शक्ति लगभग स्थिर बनी रही और उनके मस्तिष्क के 'राइट पुटामेन' क्षेत्र में उम्र से जुड़ा कोई उल्लेखनीय क्षरण नहीं पाया गया। इसके विपरीत, जिन्होंने अभ्यास छोड़ दिया था, उनमें इस हिस्से में सिकुड़न दर्ज की गई। यह मस्तिष्क का वही भाग है जो सीखने की क्षमता, स्मृति और नई जानकारी को संसाधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
याददाश्त और सीखने की क्षमता पर सकारात्मक असर
अध्ययन में यह भी सामने आया कि संगीत का नियमित अभ्यास करने वाले प्रतिभागियों की वर्बल वर्किंग मेमोरी बेहतर बनी रही। यह वही मानसिक क्षमता है जिसकी मदद से व्यक्ति किसी जानकारी को कुछ समय तक याद रखता है, उसका विश्लेषण करता है और निर्णय लेने में उसका उपयोग करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत सीखने के दौरान मस्तिष्क के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं, जिससे न्यूरल नेटवर्क मजबूत होते हैं और उम्र बढ़ने के बावजूद मानसिक लचीलापन बना रहता है।
कभी भी शुरू कर सकते हैं संगीत सीखना
शोधकर्ताओं के अनुसार यह अध्ययन इस धारणा को चुनौती देता है कि नई चीजें सीखने की क्षमता केवल युवावस्था तक सीमित होती है। यदि व्यक्ति बढ़ती उम्र में भी नियमित रूप से कोई वाद्य यंत्र सीखता और उसका अभ्यास करता है, तो इससे मस्तिष्क लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक क्षमता को बेहतर बनाए रखने का एक प्रभावी साधन भी बन सकता है। भविष्य में इस दिशा में और बड़े शोध उम्र संबंधी मानसिक बीमारियों की रोकथाम के नए रास्ते खोल सकते हैं।