भोपाल। नगर निगम की बुधवार को ISBT स्थित मीटिंग हॉल में हुई परिषद की बैठक में निगम के खाली और चयनित भवनों को किराये पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। वहीं शहर में टैक्स का बोझ बढ़ने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। कांग्रेस पार्षदों ने भोपाल का मास्टर प्लान जल्द लागू करने की मांग को लेकर परिषद अध्यक्ष की आसंदी भी घेरी।
निगम के भवन किराये पर देने का फैसला
बैठक में अटल भवन में कैफेटेरिया शुरू करने और इंडियन हाउस को दो साल के लिए किराये पर देने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली।इसके अलावा न्यू मार्केट स्थित जनसंपर्क कार्यालय, स्मार्ट सिटी कार्यालय के कुछ हिस्से, मनीषा मार्केट शाहपुरा स्थित बिल्डिंग परमिशन शाखा, ISBT के खाली कार्यालय, माता मंदिर के हर्षवर्धन कॉम्पलेक्स के रिक्त कार्यालय और वार्ड नंबर-31 के नवीन मुख्यालय भवन के सर्विस ब्लॉक को आवंटित कर मासिक किराये पर देने पर सहमति बनी।सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का फैसला लिया गया। इसके बाद बैठक स्थगित कर दी गई।
टैक्स बढ़ाने के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा
बैठक शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने शहर में टैक्स बढ़ाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने महापौर मालती राय के बजट भाषण का हवाला देते हुए सवाल किया कि जब मार्च में बजट पेश करते समय शहरवासियों पर कोई नया टैक्स नहीं बढ़ाने की बात कही गई थी, तो बाद में कई इलाकों के परिक्षेत्र बदलकर टैक्स का बोझ क्यों बढ़ाया गया।महापौर मालती राय ने जवाब दिया कि परिक्षेत्र में बदलाव हर साल की प्रक्रिया का हिस्सा है और इस बार भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत बदलाव किए गए हैं।इस पर जकी ने सवाल किया कि यदि यह नियमित प्रक्रिया है तो इसकी जानकारी बजट भाषण के दौरान क्यों नहीं दी गई।
मास्टर प्लान लागू करने की मांग
भोपाल का मास्टर प्लान तत्काल लागू करने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की आसंदी को घेर लिया।विपक्षी पार्षदों ने कहा कि शहर के व्यवस्थित विकास के लिए मास्टर प्लान बेहद जरूरी है और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।
'बजट चर्चा के दौरान मुद्दा उठाना था'
विवाद बढ़ने पर परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बजट पर चर्चा के दौरान ही टैक्स से जुड़ा मुद्दा उठाना चाहिए था।इस पर शबिस्ता जकी ने पलटवार करते हुए कहा कि बजट की जानकारी बैठक से कुछ मिनट पहले ही दी जाती है, ऐसे में पार्षद पहले से इसकी तैयारी कैसे कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि शहरवासियों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालने से पहले इसकी स्पष्ट जानकारी परिषद के सामने रखी जानी चाहिए।
सड़कों और जलभराव का मुद्दा एजेंडे से बाहर
बैठक में कांग्रेस के पार्षद मो. सरवर ने जर्जर सड़कों और जलभराव का मुद्दा उठाया, लेकिन इस पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।विपक्ष ने आरोप लगाया कि बारिश के बाद शहर की कई सड़कें बदहाल हैं। जगह-जगह सड़कें खुदी हुई हैं और गड्ढों के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सड़क, गड्ढे और जलभराव जैसे प्रमुख जनहित के मुद्दों को बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किया गया।
जनहित के मुद्दे शामिल नहीं होने पर विपक्ष नाराज
विपक्षी पार्षदों ने कहा कि नगर निगम परिषद की बैठकों में ऐसे मुद्दों पर प्राथमिकता से चर्चा होनी चाहिए, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।बारिश के बाद जलभराव, खराब सड़कें और गड्ढों की समस्या से रोजाना बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी हो रही है। विपक्ष ने इन समस्याओं को परिषद के सामने गंभीरता से उठाने की मांग की।