Chitrakoot Flood Aftermath: सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का उफान थमने के बाद बाढ़ का पानी तो उतर गया है, लेकिन इसके पीछे छोड़ी गई तबाही अब साफ दिखाई देने लगी है। घरों से लेकर दुकानों तक हर तरफ मिट्टी, कीचड़ और मलबा जमा है। कई परिवारों की गृहस्थी बर्बाद हो गई, जबकि कारोबारियों को लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पांच दिन तक चली बारिश और बाढ़ के बाद अब प्रशासन का फोकस राहत से आगे बढ़कर सफाई, बिजली बहाली और प्रभावित इलाकों को सामान्य स्थिति में लाने पर है।
पानी उतरा तो सामने आई नुकसान की असली तस्वीर
मंदाकिनी नदी के बार-बार उफान पर आने से चित्रकूट के निचले इलाकों में पानी तेजी से घुसा। लोगों को सामान सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। आरोग्यधाम में जनरल स्टोर और कपड़ों की दुकान संचालित करने वाली ममता शर्मा ने बताया कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि दुकान और घर का सामान ऊपर ले जाना संभव नहीं हो पाया। पानी और कीचड़ से बड़ी मात्रा में सामान खराब हो गया। पुरानी लंका तिराहे पर फुटवियर दुकान चलाने वाले जितेंद्र के लिए भी बाढ़ किसी बड़े झटके से कम नहीं रही। गुरुवार को दुकान खोलने पर उन्हें टूटा काउंटर, बिखरी अलमारी और कीचड़ में खराब हो चुके जूते-चप्पल मिले। उनके अनुसार करीब 3 लाख रुपये का सामान बर्बाद हुआ है।
राहत का खाना मिल रहा, अब सफाई के पानी की जरूरत
बाढ़ के दौरान प्रशासन के साथ मठ-मंदिरों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने प्रभावित लोगों तक भोजन और पानी पहुंचाया। लोगों का कहना है कि राहत सामग्री मिल रही है, लेकिन अब एक अलग समस्या खड़ी हो गई है। घरों और दुकानों में जमा कीचड़ हटाने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। एमपीटी चौराहे पर चाय-नाश्ते का होटल चलाने वाली पूनम ने बताया कि बाढ़ में काफी सामान खराब हो गया। जो कुछ बचा है, उसे साफ करने और होटल में जमा गंदगी हटाने के लिए पानी की जरूरत है। समाजसेवी रामशिरोमणि शर्मा के मुताबिक कई घरों और होटलों में अभी भी कीचड़ जमा है। नदी का पानी लाकर सफाई करना आसान नहीं है और कुछ स्थानों पर नगर परिषद की टीमों के पहुंचने में भी परेशानी हुई है।
मुख्य सड़क पर आवाजाही शुरू, गलियों में सफाई तेज
बाढ़ के बाद गुरुवार को चित्रकूट में हालात कुछ सामान्य होते दिखाई दिए। बाढ़ के कारण जिस मुख्य सड़क पर आवाजाही प्रभावित थी, वहां वाहनों का संचालन फिर शुरू हो गया। सड़क से कचरा और कीचड़ हटाने का काम भी काफी हद तक पूरा किया जा चुका है। अब प्रशासन ने मोहल्लों और अंदरूनी गलियों की ओर रुख किया है। पिछले पांच दिनों से जिला प्रशासन का बड़ा अमला चित्रकूट में मौजूद है। बचाव और राहत कार्य के बाद अब शहर को दोबारा सामान्य स्थिति में लाना प्राथमिकता बन गया है। गलियों से कीचड़ और मलबा हटाने के साथ सफाई अभियान तेज किया गया है।
बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटी टीमें
बाढ़ और लगातार बारिश का असर चित्रकूट की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा। वितरण केंद्र के 19 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए थे। इनमें से 11 ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत गुरुवार तक पूरी कर ली गई, जबकि बाकी 8 पर काम जारी है। कुल 1275 प्रभावित बिजली उपभोक्ताओं में से 709 के घरों में बिजली आपूर्ति बहाल की जा चुकी है। अभी 566 कनेक्शनों पर काम बाकी है। बारिश और कीचड़ के बीच बिजली विभाग की टीमें नेटवर्क को जल्द सामान्य करने में जुटी हुई हैं।
पांच दिन बाद दिखी धूप, लोगों को मिली थोड़ी राहत
लगातार बारिश और बादलों के बीच गुरुवार शाम करीब 4 बजे कुछ देर के लिए सूरज दिखाई दिया। पांच दिन बाद निकली धूप ने बाढ़ प्रभावित लोगों को थोड़ी राहत दी। गुरुवार को बारिश नहीं होने से प्रशासन को भी सफाई और बिजली बहाली के काम में तेजी लाने का मौका मिला। हालांकि, हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। कई घरों में सामान कीचड़ से खराब पड़ा है और दुकानदार अपने नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।
अब सामने है घर और कारोबार दोबारा खड़ा करने की चुनौती
चित्रकूट में पानी उतरने के साथ बाढ़ का तत्काल संकट भले ही कम हुआ हो, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने असली मुश्किल अब शुरू हुई है। किसी की पूरी गृहस्थी खराब हो गई तो किसी की दुकान का स्टॉक बर्बाद हो गया। सफाई, बिजली बहाली और फिर घर-कारोबार को दोबारा खड़ा करना लोगों के लिए बड़ी चुनौती है। पांच दिनों की बारिश और मंदाकिनी के उफान के बाद अब चित्रकूट धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रहा है। बाढ़ का पानी पीछे हट चुका है, लेकिन उसके निशान मिटाने में अभी वक्त लगेगा।