मध्यप्रदेश में इस बार स्वैच्छिक तबादलों को प्राथमिकता दिए जाने की तैयारी की जा रही है। सीएम डॉ.मोहन यादव के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नई स्थानांतरण नीति का ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसे आगामी कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है।
पिछली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं स्वैच्छिक स्थानांतरण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि कर्मचारियों को स्वेच्छा से स्थानांतरण का अधिक अवसर मिलना चाहिए।
दरअसल, बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी व्यक्तिगत कारणों से स्वैच्छिक स्थानांतरण की मांग करते हैं, लेकिन विभागीय प्राथमिकता प्रशासनिक आधार पर तबादले करने की रहती है। इससे कई आवेदनों का निराकरण नहीं हो पाता और कार्य प्रभावित होता है।
नई नीति में स्वैच्छिक तबादलों को प्राथमिकता
सूत्रों के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग स्थानांतरण नीति-2026 में यह प्रावधान शामिल कर सकता है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण के आवेदनों का पहले गुण-दोष के आधार पर निराकरण किया जाएगा।यदि संभव हुआ तो पहले स्वेच्छा से आवेदन करने वाले कर्मचारियों के तबादले किए जाएंगे और उसके बाद प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे।माना जा रहा है कि इस वर्ष स्थानांतरण पर लगा प्रतिबंध 15 मई से 15 जून तक हटाया जा सकता है।
स्वैच्छिक तबादलों के बताए गए फायदे
सरकार का मानना है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण से प्रशासनिक खर्च भी कम होता है और कर्मचारी अपनी पसंद के स्थान पर बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं। इन्हीं व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार नई नीति में बदलाव की तैयारी कर रही है।
नीति में शामिल हो सकते हैं ये प्रावधान
अखिल भारतीय सेवा, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी।
शिक्षा विभाग के लिए अलग स्थानांतरण नीति बनाई जाएगी, जो सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के अनुरूप होगी।
जिला और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर स्थानांतरण कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री की मंजूरी के बाद किए जाएंगे।
प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री के समन्वय से होंगे।
पिछले एक वर्ष में स्थानांतरित कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में दोबारा स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।
उप पुलिस अधीक्षक से नीचे के अधिकारियों-कर्मचारियों के स्थानांतरण पुलिस स्थापना बोर्ड के माध्यम से किए जाएंगे।
गंभीर बीमारी, न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायत या अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी तबादले किए जा सकेंगे।