ग्वालियर। शहरों की सड़कों पर बढ़ती ई-रिक्शों की संख्या और इससे पैदा हो रही यातायात की समस्या को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को ई-रिक्शा संचालन के लिए स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत 60 दिनों के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति तैयार करने को कहा गया है। नई व्यवस्था में ई-रिक्शों की संख्या, उनके रूट और परमिट से जुड़े नियम तय किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य किसी एक सड़क या इलाके में ई-रिक्शों की अत्यधिक संख्या से पैदा होने वाली जाम और यातायात अव्यवस्था को नियंत्रित करना है।
अब हर सड़क पर नहीं चलेगा मनमाना ई-रिक्शा, रूट के हिसाब से मिलेगा परमिट
हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक प्रस्तावित नीति में ई-रिक्शा संचालन के लिए रूट परमिट व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया जाएगा। यानी जिस ई-रिक्शा को जिस रूट का परमिट दिया जाएगा, उसे उसी निर्धारित मार्ग पर चलने की अनुमति होगी। इसके साथ ही अलग-अलग इलाकों और सड़कों की क्षमता के अनुसार ई-रिक्शों की संख्या भी निर्धारित करने की व्यवस्था की जाएगी। आबादी, सड़क की स्थिति और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह तय किया जा सकेगा कि किसी इलाके में कितने ई-रिक्शा संचालित किए जाएं। इससे एक ही रूट पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शों के जमा होने की समस्या को कम करने की कोशिश होगी।
10 साल से चल रहे ई-रिक्शा, लेकिन नियमों की कमी पर कोर्ट ने जताई चिंता
यह आदेश जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने निशा गुर्जर की जनहित याचिका का निराकरण करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि देश में ई-रिक्शा को चलते हुए करीब एक दशक हो चुका है, लेकिन इनके संचालन को लेकर स्पष्ट और व्यापक व्यवस्था की जरूरत बनी हुई है। अनियंत्रित संचालन के कारण कई जगहों पर यातायात संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। साथ ही कोर्ट के समक्ष उन वाहन संचालकों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी आया, जो निर्धारित परमिट और शुल्क के साथ अपने वाहन संचालित करते हैं।
केंद्र बनाएगा नीति, राज्यों को भेजी जाएगी गाइडलाइन
हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार को 60 दिनों के भीतर राष्ट्रीय नीति तैयार कर सभी राज्यों को भेजनी होगी। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार को इस नीति को लागू करने के लिए 120 दिनों की समयसीमा दी गई है। हालांकि, राज्य को अपने यहां की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसमें जरूरी बदलाव करने की छूट रहेगी। यानी राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक ढांचा तैयार होगा, लेकिन किसी राज्य में ई-रिक्शों की संख्या और रूट तय करते समय वहां की आबादी, सड़कों की क्षमता और भौगोलिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा सकेगा।
जाम से लेकर दूसरे वाहन संचालकों तक, क्यों जरूरी हुई नई व्यवस्था?
ई-रिक्शा छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक सार्वजनिक परिवहन का अहम साधन बन चुके हैं। कम दूरी की यात्रा के लिए इनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं। लेकिन किसी इलाके में इनकी संख्या जरूरत से ज्यादा बढ़ने पर सड़क पर यातायात का दबाव भी बढ़ सकता है। नई नीति के जरिए ई-रिक्शों की संख्या और उनके रूट को व्यवस्थित करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही परमिट व्यवस्था से यह स्पष्ट करने का प्रयास होगा कि कौन सा वाहन किस मार्ग पर संचालित हो सकता है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इसका सीधा असर शहरों के ट्रैफिक मैनेजमेंट पर देखने को मिल सकता है।
MP में 120 दिन में लागू करनी होगी व्यवस्था
ग्वालियर खंडपीठ के आदेश के बाद अब केंद्र और राज्य सरकार के सामने अलग-अलग समयसीमा तय है। केंद्र को पहले राष्ट्रीय नीति तैयार करनी होगी और उसे राज्यों तक पहुंचाना होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश को स्थानीय जरूरतों के अनुसार व्यवस्था तैयार कर उसे लागू करना होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में ई-रिक्शा संचालन को लेकर रूट, परमिट और संख्या से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।