भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार चुनाव प्रक्रिया में तकनीक का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ने वाला है। आयोग की योजना सफल रही तो आगामी पंचायत चुनावों में पंच और सरपंच पदों के लिए भी बैलेट पेपर की जगह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल किया जाएगा।इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के सभी प्रमुख पदों के लिए ईवीएम से मतदान कराने की दिशा में मध्यप्रदेश एक बड़ा कदम उठाएगा। इससे मतदान के बाद मतगणना की प्रक्रिया को तेज करने के साथ चुनाव परिणाम जल्द जारी करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
जून-जुलाई 2027 में होंगे स्थानीय चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग की प्रस्तावित चुनावी तैयारियों के मुताबिक वर्ष 2027 में पहले नगरीय निकाय और उसके बाद पंचायत चुनाव कराए जाने हैं। नगरीय निकाय चुनाव जून 2027 में प्रस्तावित हैं, जबकि इसके अगले महीने यानी जुलाई 2027 में पंचायत चुनाव होने की तैयारी है।नगरीय निकाय चुनाव के लिए प्रदेश की करीब 413 नगरीय संस्थाओं में मतदान कराया जाएगा। इसके लिए लगभग 22 हजार मतदान केंद्र तैयार किए जाने की योजना है।इसके बाद जुलाई में करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों में चुनाव होंगे। पंचायत चुनाव के लिए प्रदेशभर में लगभग 72 हजार मतदान केंद्र बनाए जाने की तैयारी है।
पंच और सरपंच चुनाव में पहली बार EVM का इस्तेमाल
मध्यप्रदेश में पंचायत चुनावों के दौरान पंच और सरपंच पदों पर मतदान के लिए लंबे समय से बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता रहा है। वर्ष 2022 के स्थानीय चुनावों में भी जिला और जनपद पंचायत सदस्यों के साथ नगरीय निकाय के विभिन्न पदों के चुनाव ईवीएम से कराए गए थे।हालांकि, पंच और सरपंच पदों के लिए मतपत्र से मतदान कराया गया था। अब आयोग आगामी चुनावों में इस व्यवस्था को बदलने की तैयारी कर रहा है।
यदि प्रस्तावित व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाता है, तो 2027 के पंचायत चुनावों में पंच और सरपंच के मतदाता भी ईवीएम के माध्यम से अपना वोट डाल सकेंगे। इससे प्रदेश में स्थानीय चुनावों की मतदान प्रक्रिया पहले से अधिक तकनीकी आधारित हो जाएगी।
चुनाव की तैयारियों को लेकर पहली बड़ी समीक्षा बैठक
चुनावी व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। इसी क्रम में आयोग कार्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के 44 जिलों के उप निर्वाचन अधिकारी और मास्टर ट्रेनर्स शामिल हुए।बैठक में चुनाव से संबंधित प्रशिक्षण, ईवीएम के संचालन, मतदान केंद्रों की व्यवस्था और तकनीकी चुनौतियों समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। आयोग का जोर इस बात पर है कि चुनाव की तैयारियां मतदान की तारीख घोषित होने से काफी पहले पूरी कर ली जाएं, ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी न हो।
2027 में बढ़ेगा मतदान केंद्रों का बड़ा नेटवर्क
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों का दायरा काफी बड़ा होने के कारण आयोग के सामने बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों की व्यवस्था करना भी चुनौतीपूर्ण होगा।नगरीय निकाय चुनाव के लिए करीब 22 हजार मतदान केंद्रों की जरूरत होगी। वहीं पंचायत चुनाव के दौरान लगभग 72 हजार मतदान केंद्रों पर मतदान कराया जाना प्रस्तावित है। इतने बड़े स्तर पर ईवीएम की उपलब्धता, परिवहन, सुरक्षा, भंडारण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यापक व्यवस्था करनी होगी।
मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग से बढ़ेगी निगरानी
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मतदान केंद्रों की लाइव वेबकास्टिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके जरिए चुनाव अधिकारी दूर बैठकर भी मतदान केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे।वेबकास्टिंग का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करना और किसी भी तरह की अनियमितता की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की संभावना बढ़ाना है। संवेदनशील और महत्वपूर्ण मतदान केंद्रों पर तकनीकी निगरानी को चुनाव व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।
दूसरे राज्यों को भी EVM उपलब्ध करा रहा मध्यप्रदेश
स्थानीय चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर मध्य प्रदेश केवल अपनी जरूरतों तक सीमित नहीं है। अंतर-राज्यीय सहयोग के तहत प्रदेश की ओर से कुछ अन्य राज्यों को भी स्थानीय चुनावों के लिए ईवीएम उपलब्ध कराई गई हैं।बताया गया है कि त्रिपुरा, सिक्किम, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों को भी स्थानीय चुनावों के लिए मशीनें उपलब्ध कराने में सहयोग किया गया है। इससे चुनावी तकनीक और संसाधनों के स्तर पर राज्यों के बीच सहयोग की तस्वीर सामने आती है।
तकनीक के साथ मतदाताओं का भरोसा भी जरूरी
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी बदलावों के साथ मतदाताओं का विश्वास बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।उनका जोर इस बात पर है कि स्थानीय चुनाव सीधे तौर पर आम लोगों से जुड़े होते हैं। ऐसे में ईवीएम या किसी अन्य तकनीकी व्यवस्था से संबंधित समस्या सामने आने पर उसका समाधान समय रहते किया जाना जरूरी है।आयोग के सामने चुनौती केवल ईवीएम से मतदान कराने की नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को इस तरह संचालित करने की है कि मतदाताओं को चुनाव की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर किसी तरह की आशंका न रहे।
तेजी से आएंगे चुनाव परिणाम
ईवीएम से मतदान कराने का एक प्रमुख फायदा मतगणना के समय देखने को मिल सकता है। बैलेट पेपर की तुलना में ईवीएम के जरिए वोटों की गिनती अपेक्षाकृत तेजी से पूरी की जा सकती है। इससे चुनाव परिणाम घोषित करने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में पंचायतों और मतदान केंद्रों पर ईवीएम आधारित चुनाव कराना आयोग के लिए एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी अभ्यास होगा। मशीनों की उपलब्धता से लेकर कर्मचारियों के प्रशिक्षण और मतदान केंद्रों तक उनके सुरक्षित पहुंचने की व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी।
2027 के चुनाव में देखने को मिलेगा तकनीकी बदलाव
कुल मिलाकर मध्यप्रदेश के 2027 के स्थानीय चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण होने वाले हैं। यदि राज्य निर्वाचन आयोग की प्रस्तावित योजना लागू होती है, तो पंच और सरपंच पदों के लिए भी ईवीएम से मतदान कराया जाएगा। इसके साथ वेबकास्टिंग, व्यापक प्रशिक्षण और तकनीकी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं चुनाव प्रक्रिया को और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम होंगी।
फिलहाल आयोग की तैयारियां शुरुआती चरण में हैं और आने वाले महीनों में चुनावी कार्यक्रम, मतदान की अंतिम तारीखों तथा ईवीएम से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।