भोपाल। मध्यप्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे पटवारियों के बीच राज्य सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लिया है। अब प्रदेश में किसी भी पटवारी के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। कार्रवाई से पहले संबंधित मामले की प्रारंभिक जांच (प्रारंभिक परीक्षण) अनिवार्य होगी। इसके बाद ही आवश्यक होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी पटवारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मामला प्रथम दृष्टया कार्रवाई योग्य है या नहीं। बिना प्रारंभिक परीक्षण के सीधे एफआईआर दर्ज करने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
हड़ताल के बीच आया सरकार का फैसला
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब प्रदेशभर के पटवारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण कई जिलों में राजस्व से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसी बीच सरकार ने पटवारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा करने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में यह कदम उठाया है।
दर्ज मामलों की भी होगी जांच
राजस्व विभाग ने कलेक्टरों से यह भी कहा है कि पटवारियों के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर या प्रस्तावित कार्रवाई के मामलों की भी वस्तुनिष्ठ जांच कराई जाए। यदि किसी मामले में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है तो उसकी समीक्षा कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निष्पक्ष कार्रवाई पर रहेगा जोर
सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। इसलिए किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी। प्रारंभिक जांच की व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी के साथ अनावश्यक या जल्दबाजी में कार्रवाई न हो, वहीं दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा सके।