भोपाल। मध्य प्रदेश में आत्महत्या के लगातार बढ़ते मामलों ने सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में एक साल के दौरान 15 हजार 491 लोगों ने आत्महत्या की। यह आंकड़ा देश में दर्ज कुल आत्महत्याओं का करीब 9.1 प्रतिशत है। इसी के साथ मध्य प्रदेश आत्महत्या के मामलों में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
बीमारी, तनाव और आर्थिक दबाव बने बड़ी वजह
रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या के पीछे बीमारी, पारिवारिक विवाद, आर्थिक संकट, मानसिक अवसाद और भविष्य को लेकर असुरक्षा जैसी वजहें प्रमुख रूप से सामने आई हैं। प्रदेश में 3 हजार से ज्यादा लोगों ने गंभीर बीमारी से परेशान होकर अपनी जान दे दी। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और काउंसलिंग न मिलना भी बड़ी वजह बन रहा है।
गृहिणियों और युवाओं में बढ़े मामले
महिलाओं, खासकर गृहिणियों के बीच आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। घरेलू तनाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव इसके पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
वहीं छात्र और युवा भी मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं का तनाव, करियर को लेकर असफलता का डर और सामाजिक दबाव युवाओं को अवसाद की ओर धकेल रहा है।
किसानों और कर्मचारियों में भी बढ़ा तनाव
खेती-किसानी से जुड़े लोगों में भी आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। फसल खराब होना, कर्ज और आय की अनिश्चितता ग्रामीण इलाकों में बड़ी वजह बनकर उभरी है। इसके अलावा सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच भी तनाव और डिप्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महिला अपराधों में भी चिंताजनक स्थिति
एनसीआरबी रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर भी मध्य प्रदेश की स्थिति गंभीर बताई गई है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 32 हजार से ज्यादा महिला अपराध दर्ज किए गए। महिलाओं के साथ शोषण और उत्पीड़न के मामलों में भी मध्य प्रदेश देश के शीर्ष राज्यों में शामिल रहा। बड़े शहरों में इंदौर महिला अपराध के मामलों में प्रमुख शहरों की सूची में शामिल है।
बच्चों और एससी-एसटी वर्ग के खिलाफ अपराध भी बढ़े
बच्चों के खिलाफ अपराधों में भी प्रदेश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। साइबर अपराध, बाल शोषण और सामाजिक असुरक्षा को इसके पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के खिलाफ अपराधों में भी मध्य प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है। खासकर आदिवासी समुदाय के खिलाफ बढ़ते अपराध चिंता का विषय बने हुए हैं।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आत्महत्या और अपराध की घटनाओं को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, युवाओं को भावनात्मक सहयोग देना और परिवार स्तर पर संवाद बढ़ाना बेहद जरूरी है।