सतना. मध्य प्रदेश के सतना केंद्रीय जेल से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने समाज की पारंपरिक सोच को झकझोर कर रख दिया है। यहां सहायक जेलर फिरोजा खातून को उसी कैदी से प्यार हो गया, जो हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। शुरुआत में यह रिश्ता केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता गया। जेल की सख्त दीवारों के भीतर शुरू हुई यह कहानी अब जीवनभर के साथ में बदल चुकी है।
वारंट के काम से बढ़ी नजदीकिया
जानकारी के अनुसार फिरोजा खातून जेल में वारंट इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। वहीं छतरपुर जिले के चंदला क्षेत्र निवासी धर्मेंद्र सिंह जेल के भीतर वारंट संबंधी कार्यों में सहयोग करते थे। लगातार संवाद और कार्य के दौरान दोनों एक-दूसरे को समझने लगे। समय के साथ यह परिचय दोस्ती और फिर गहरे प्रेम में बदल गया। हालांकि दोनों जानते थे कि उनका रिश्ता सामाजिक और धार्मिक स्तर पर आसान नहीं होगा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने संबंध को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
हत्या के मामले में काटी थी उम्रकैद
धर्मेंद्र सिंह को वर्ष 2007 में नगर परिषद अध्यक्ष कृष्णादत्त दीक्षित हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कई वर्षों तक जेल में रहने के बाद करीब चार वर्ष पहले उनकी रिहाई हुई। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा। रिश्ते की गहराई समय के साथ और मजबूत होती गई, जिसके बाद दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया।
धर्म और समाज की दीवारों से टकराया प्यार
एक तरफ मुस्लिम परिवार से आने वाली फिरोजा खातून थीं, तो दूसरी तरफ हिंदू युवक धर्मेंद्र सिंह। ऐसे में यह रिश्ता परिवार और समाज दोनों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया। बताया जा रहा है कि फिरोजा के परिवार ने इस विवाह का विरोध किया, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर अडिग रहने का निर्णय लिया। दोनों ने यह साबित किया कि प्रेम केवल धर्म या जाति की सीमाओं में बंधा नहीं होता, बल्कि आपसी विश्वास और सम्मान ही किसी रिश्ते की असली नींव होते हैं।
हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुई शादी
5 मई को छतरपुर जिले के लवकुशनगर में दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया। वैदिक मंत्रोच्चार, सात फेरे और पारंपरिक रस्मों के बीच यह विवाह संपन्न हुआ। सबसे खास बात यह रही कि दुल्हन पक्ष से कोई सदस्य समारोह में शामिल नहीं हुआ। ऐसे में विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने कन्यादान की रस्म निभाई। विवाह समारोह में बजरंग दल से जुड़े कई कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
सोशल मीडिया पर छाई प्रेम कहानी
शादी के बाद जैसे ही दोनों की तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर यह प्रेम कहानी तेजी से वायरल हो गई। लोग इसे “मोहब्बत की जीत” और “सामाजिक साहस” की मिसाल बता रहे हैं। कई लोग इस रिश्ते को इंसानियत और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की जीत मान रहे हैं, जबकि कुछ वर्ग इसे सामाजिक बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल यह अनोखी शादी पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।