उज्जैन. विश्व के सबसे विशाल धार्मिक आयोजनों में शामिल सिंहस्थ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का विराट उत्सव माना जाता है। वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ को लेकर राज्य सरकार ने अभी से व्यापक स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि आगामी सिंहस्थ का उद्देश्य केवल करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन का प्रबंधन करना नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सुविधाजनक और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक अनुभव उपलब्ध कराना है। इसके लिए अधोसंरचना विकास, आधुनिक प्रबंधन प्रणाली और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष बल दिया जा रहा है।
40 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन को ध्यान में रखकर बन रही कार्ययोजना
कार्यशाला के दौरान अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ 2028 में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है, जबकि करीब 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान में भाग ले सकते हैं। इतनी विशाल संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने सड़क, परिवहन, पेयजल, स्वच्छता, विद्युत, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा व्यवस्था और अस्थायी आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार का व्यापक खाका तैयार किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सफल प्रबंधन केवल पूर्व नियोजित अधोसंरचना और तकनीक आधारित संचालन प्रणाली के माध्यम से ही संभव हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने साझा किए पुराने सिंहस्थ के अनुभव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यशाला के दौरान अपने छात्र जीवन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1980 के दशक में वे स्काउट-गाइड के सदस्य के रूप में सिंहस्थ में सेवा कार्य कर चुके हैं तथा वर्ष 1992 के सिंहस्थ में सिंहस्थ समिति के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने एक रोचक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि एक बार कार्यालय के प्रवेश द्वार पर तैनात एक वरिष्ठ कर्मचारी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए भीतर प्रवेश नहीं करने दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अनुभव प्रशासनिक अनुशासन, पारदर्शिता और जिम्मेदारी का महत्व सिखाते हैं तथा भविष्य के आयोजनों को अधिक प्रभावी बनाने की प्रेरणा देते हैं।
सड़क, पुल और यातायात व्यवस्था में होगा व्यापक विस्तार
सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों श्रद्धालुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का विस्तार तेज गति से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शहर को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण किया जा चुका है और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए क्षिप्रा नदी पर 22 नए पुलों के निर्माण की योजना पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं को विभिन्न घाटों, पार्किंग स्थलों और आवासीय क्षेत्रों तक पहुंचने में पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधा मिलेगी तथा यातायात दबाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।
घाटों, स्नान व्यवस्था और ठहरने की सुविधाओं को मिलेगा आधुनिक स्वरूप
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि सिंहस्थ की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार सुरक्षित स्नान व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से क्षिप्रा नदी के घाटों का सुदृढ़ीकरण, सौंदर्यीकरण और विस्तार किया जा रहा है। नदी के प्रवाह को बेहतर बनाए रखने, घाटों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ाने तथा भीड़ प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए अनेक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही धर्मशालाओं, यात्री निवासों, अस्थायी आवासीय परिसरों और अन्य ठहरने की व्यवस्थाओं का भी विस्तार किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
रेलवे, पड़ोसी राज्यों और सामाजिक संगठनों के साथ होगा समन्वित प्रबंधन
सिंहस्थ के दौरान परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रेल के साथ प्रारंभिक स्तर से ही समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि विशेष रेल सेवाओं, अतिरिक्त ट्रेनों और यात्री सुविधाओं की प्रभावी योजना तैयार की जा सके। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों के प्रशासन, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों तथा पूर्व सिंहस्थ आयोजनों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों के सुझावों को भी योजना का हिस्सा बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि व्यापक जनभागीदारी और बहुस्तरीय समन्वय के माध्यम से ही इतने विशाल आयोजन का सफल संचालन संभव हो सकेगा।
धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में और मजबूत होगी उज्जैन की पहचान
महाकाल लोक के विकास, आधुनिक अधोसंरचना और तीर्थ पर्यटन के निरंतर विस्तार के बाद उज्जैन आज देश के प्रमुख धार्मिक नगरों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षमता और आर्थिक संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का अवसर भी बनेगा। धार्मिक पर्यटन स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन, हस्तशिल्प और रोजगार सृजन को भी नई गति प्रदान करता है। सरकार का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी प्रशासन, सुरक्षित व्यवस्थाओं और श्रद्धालु-केंद्रित सुविधाओं के माध्यम से सिंहस्थ 2028 को विश्व के सबसे सुव्यवस्थित और प्रेरणादायी आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल किया जाए।