भोपाल। मध्यप्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह को कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में बड़ी राहत मिली है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कैबिनेट की उस अनुशंसा को मंजूरी दे दी है, जिसमें विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने की सिफारिश की गई थी। अब प्रदेश सरकार इस संबंध में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।
कैबिनेट की अनुशंसा पर राज्यपाल की मुहर
विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति के मामले में राज्य सरकार ने अपना फैसला ले लिया है। कैबिनेट की अनुशंसा के बाद प्रस्ताव राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास भेजा गया था। मंगलवार को राज्यपाल ने इस प्रस्ताव पर अनुमोदन की मुहर लगा दी। इसके बाद गृह विभाग ने मामले में आदेश का प्रारूप तैयार कर विधि एवं विधायी विभाग से परीक्षण कराया और इसे मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद गृह विभाग अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने संबंधी आदेश जारी करेगा।
जल्द सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी रिपोर्ट
राज्य सरकार की ओर से इस फैसले की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब इस मामले में अभियोजन की स्वीकृति को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्य सरकार से जल्द फैसला लेने को कह चुका है। सरकार की ओर से आदेश जारी होने के बाद संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी।
क्या है विजय शाह का पूरा मामला?
दरअसल, 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लेते हुए ऐसी टिप्पणी की, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। विपक्षी दलों ने विजय शाह के बयान को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। विवाद बढ़ने के बाद मामला अदालत तक पहुंचा और हाईकोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया। SIT ने अपनी जांच पूरी करने के बाद सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की। इसके साथ ही विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति का मुद्दा सामने आया।
अभियोजन की मंजूरी पर सरकार से मांगा गया था फैसला
मामले में लगातार निर्णय नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को अभियोजन की स्वीकृति के संबंध में जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 25 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में राज्यपाल से अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने की अनुशंसा करने का फैसला लिया गया। प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा गया, जिस पर अब उनकी मंजूरी मिल चुकी है।
अब आगे क्या होगा?
राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश प्रारूप को अंतिम स्वीकृति मिलने का इंतजार है। इसके बाद गृह विभाग अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने का आदेश जारी करेगा। सरकार की ओर से इस फैसले से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। ऐसे में अब पूरे मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश होने के बाद आगे बढ़ेगी।