New Delhi: लोकसभा चुनाव अब नजदीक ही हैं और ऐसे (Loksabha Election 2024) में दल-बदल और गठबंधन को लेकर सियासत तेज हैं। अब ऐसे में चर्चा हैं कि जाट नेता जयंत चौधरी बीजेपी के साथ जा सकते हैं। लेकिन 18 अगस्त 2023 को जाट नेता जयंत चौधरी ने BJP के साथ जाने के सवाल पर कहा था कि 'जो मुझे समझ नहीं पाए, वही इस बात की चर्चा कर रहे हैं। मैं बहुत जिद्दी आदमी हूं। जब कह देता हूं, मन बना लेता हूं तो बदलता नहीं हूं।' और अब 5 महीने भी नहीं बीते कि जयंत के BJP के साथ जाने की चर्चा तेज है। पिछले 2 लोकसभा चुनावों में जयंत की पार्टी एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई है। इसके बावजूद राम लहर पर सवार BJP जयंत को अपने साथ क्यों लाना चाहती है? UP में जयंत और उनकी राष्ट्रीय लोकदल पार्टी की क्या हैसियत है? 2024 में BJP और RLD दोनों के लिए ये गठजोड़ क्यों जरूरी है? आईये इन सवालों के जवाब जाननें की कोशिश करते हैं
BJP ने जयंत चौधरी के सामने रखा है प्रस्ताव!
अंग्रेजी अखबार द हिंदू में छपी एक खबर में दावा (Loksabha Election 2024) किया गया कि BJP ने राष्ट्रीय लोक दल यानी RLD के प्रमुख चौधरी जयंत सिंह को एक ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिससे इनकार करना उनके लिए आसान नहीं होगा। जयंत की पार्टी को केंद्र और राज्य दोनों जगह मंत्री पद दिया जा सकता है। साथ ही RLD को 4 लोकसभा सीट के अलावा 1 राज्यसभा सीट भी ऑफर की जा सकती है। RLD के प्रवक्ता पवन आगरी ने कहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में BJP ने हमें 4 सीट ऑफर की हैं। हम लोग 12 सीटों की मांग कर रहे हैं। इसके बाद से ही 2024 लोकसभा चुनाव में RLD के BJP के साथ जाने की संभावना जाहिर की जा रही है।वेस्ट यूपी में RLD का कितना प्रभाव?
दरअसल, जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं में से एक हैं। 1970 के दशक से ही जयंत की पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों का समर्थन मिलता आ रहा है। UP में रहने वाले 99% जाट पश्चिमी UP के 27 लोकसभा क्षेत्रों में रहते हैं। जयंत चौधरी के दादा और पूर्व PM चौधरी चरण सिंह अपने समय के सबसे बड़े जाट नेता थे। 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल BKD ने 402 में से 98 सीटें जीती थीं। इस दौरान पार्टी का वोट शेयर 21.29% था।इन जातियों का मिला भरपूर साथ
इस दौरान उन्हें पश्चिमी UP की जाट, मुस्लिम समेत सभी जातियों का भरपूर साथ मिला। यह इस बात से भी जाहिर होता है कि 1987 में उनके निधन के बाद तक के चुनावों में उनकी पार्टी का वोट शेयर 20% के करीब बना हुआ था। 1999 में चौधरी अजित सिंह ने दोबारा से राष्ट्रीय लोकदल यानी RLD के नाम से अपनी पार्टी लॉन्च की। पिता के बाद अजीत सिंह अपने पिता चौधरी चरण सिंह के पारंपरिक वोटों को नहीं संभाल पाए और वे सिर्फ जाटों और मुस्लिमों के नेता बनकर रह गए। रही सही कसर 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे ने पूरी कर दी। इसके चलते अजीत सिंह की रालोद (RLD) को काफी नुकसान हुआ। RLD से जाट वोट बैंक छिटक गया। हालांकि, किसान आंदोलन के समय अजित सिंह और उनके बेटे जयंत ने किसानों का समर्थन किया। किसान आंदोलन की अगुआई जाट और मुस्लिम दोनों मिलकर कर रहे थे। एक बार फिर जाट के साथ मुस्लिमों ने जयंत पर भरोसा किया। परिणाम ये हुआ कि 2017 में RLD ने 1 सीट पर जीत हासिल की थी, जो 2022 में बढ़कर 8 हो गईं।पिछले दो लोकसभा में RLD के खाते में 0 सीट
पश्चिमी UP में लोकसभा की कुल 27 सीटें हैं। इनमें से मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद मंडल (Loksabha Election 2024) की 14 सीटों पर जाटों का वोट ही जीत और हार तय करता है। इन सीटों पर जयंत चौधरी की पार्टी RLD निर्णायक भूमिका निभाती रही है। 2019 लोकसभा चुनाव में इन 14 सीटों में से सिर्फ 7 सीटों पर BJP को जीत मिली थी, जबकि 7 सीटों में से 4 पर बसपा और 3 पर सपा को जीत मिली थी। इस बार मिशन 370 के तहत BJP पश्चिमी UP के जाटलैंड की सभी 14 सीटों को जीतना चाहती है। BJP को पता है कि जयंत चौधरी और उनकी पार्टी के समर्थन के बिना ये संभव नहीं है। पश्चिम UP में करीब 18% जाट आबादी है, जो सीधे चुनाव पर असर डालती है। यानी जाट समुदाय का एकमुश्त वोट पश्चिमी UP में किसी भी दल की हार-जीत तय करता आ रहा है।इन दो फेक्टर की वजह से BJP को RLD की जरूरत
- 2020 के किसान आंदोलन के दौरान 700 किसानों की मौत से जाटों में केंद्र सरकार के प्रति गुस्सा है। इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम और जाट समुदाय के बीच विभाजन की खाई काफी हद तक कम हो गई है।- गन्ना किसानों का बकाया और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, यानी MSP से जुड़ी मांगों का समाधान नहीं होने से भी किसानों में गुस्सा है। BJP जयंत से गठबंधन कर उस नुकसान की भरपाई करना चाहती है।
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