अयोध्या - अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर के दान में कथित वित्तीय हेराफेरी के मामले पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना राम मंदिर के लिए एक तरह का कलंक है और इससे जुड़े सभी लोग स्वयं को शर्मिंदा, निराश और क्षमाप्रार्थी महसूस कर रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा - यह घटना राम मंदिर पर एक तरह का कलंक है। इसे लेकर हम सभी न केवल क्षमाप्रार्थी हैं, बल्कि शर्मिंदा और निराश भी हैं।
दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह मामला मंदिर प्रबंधन से जुड़ा है और इसकी जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मंदिर की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार किए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
नए CEO की नियुक्ति के लिए बनी समिति
राम मंदिर ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर भी मिश्रा ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नए CEO के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है और अंतिम निर्णय इसी समिति की सिफारिश के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।
मंदिर निर्माण अंतिम चरण में
नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुराने मंदिर को स्मारक के रूप में विकसित करने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब केवल अखंड ज्योति की व्यवस्था का काम शेष है, जो 24 घंटे लगातार प्रज्वलित रहेगी। उन्होंने कहा कि मुख्य मंदिर निर्माण का अंतिम चरण 30 जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद है।
नवंबर-दिसंबर तक पूरी होंगी अन्य परियोजनाएं
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर से जुड़ी अन्य विकास परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। इनमें करीब चार किलोमीटर लंबी चारदीवारी और मंदिर परिसर के बाहर बनने वाला ऑडिटोरियम शामिल है। इन परियोजनाओं के नवंबर-दिसंबर तक पूरा होने की संभावना है।
आधुनिक स्वरूप में विकसित होगा राम कथा संग्रहालय
राम कथा संग्रहालय के बारे में जानकारी देते हुए मिश्रा ने बताया कि इसकी 20 गैलरियों की स्टोरी लाइन तैयार हो चुकी है। अब डिजिटल इंस्टॉलेशन, वीडियो कंटेंट और अन्य तकनीकी प्रस्तुतियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन और इतिहास का बेहतर अनुभव मिल सके। उन्होंने कहा कि संग्रहालय को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष अनुभव प्राप्त होगा।