5 शताब्दियों के बाद प्रभु श्री राम अपने भव्य और दिव्य राम मंदिर में विराजमान हुए। वही भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात् मंदिर में भक्तों के लिए खोल दिया है। उद्धव गुट ने सामना में छपे संपादकीय लेख के माध्यम से पीएम मोदी पर हमला बोला है। उद्धव गुट का कहना है कि, आज देश का राममय हो जाना भी एक राजनीतिक रचना का हिस्सा है, लेकिन क्या देश में रामराज्य आ गया है ?
राम मंदिर के संघर्ष में बाला साहेब का नाम सबसे ऊपर आता है
बता दें कि, सामना ने अपने संपादकीय में लिखा है कि, जहां पूरे देश में खुशी का माहौल है। वहीं, शिवसेना बाला साहेब ठाकरे की जयंती मना रही है। ये मंगल योग है। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। राम मंदिर के लिए किए गए संघर्ष में बाला साहेब का नाम सबसे ऊपर आता है। आगे इस लेख में लिखा है कि, बीजेपी का वर्तमान नेतृत्व इसके लिए आभारी नहीं है, लेकिन प्रभु श्री राम ने 22 जनवरी यानी शिवसेना प्रमुख के जन्मदिन की पूर्व शाम को मंदिर में विराजने का फैसला किया था। ये भी एक अद्भुत योग है।
क्या पीएम करोंड़ों लोगों की भूख मिटाने के लिए उपवास करेंगे?
सामना ने आगे लिखा है कि, श्री राम को तो घर मिल गया, लेकिन देश में करोंड़ों लोग बेघर और भूखे हैं। पीएम मोदी ने अयोध्या जाकर श्रीराम के लिए उपवास किया है, क्या वह देश के करोंड़ों लोगों की भूख मिटाने के लिए उपवास करने जा रहे हैं ? वहीं आगे भाजपा पर हमला बोलते हुए लिखा कि, बीजेपी का अयोध्या उत्सव का मकसद देश को राम के नाम पर सिर्फ मोदी-मोदी कराना होगा व पाखंड को बेनकाब करने के लिए आज शिवसेना प्रमुख की ही आवश्यकता थी।
आज देश में राष्ट्रवाद की परिभाषाएं बदल गई
उन्होंने अपने इस लेख में आगे लिखा है कि, अगर शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे न होते तो मराठी मानुष हमेशा के लिए गुलाम हो गया होता। मुंबई महाराष्ट्र से अलग हो गई होती। महाराष्ट्र का स्वाभिमान मिट्टी में मिल गया होता। महाराष्ट्र आज भी दिल्ली की नई मुगलशाही के खिलाफ लड़ रहा है तो केवल ये बालासाहेब ठाकरे की प्रेरणा के ही कारण है! आज सभी राष्ट्रीय संस्थाएं, न्यायालय, संविधान के चौकीदार, चुनाव आयोग, राजभवन सरकार के हाथों की कठपुतली बनकर कठपुतलियों की भांति नाच रहे हैं। आज देश में राष्ट्रवाद की परिभाषाएं बदल गई।
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