नई दिल्ली. भारतीय पायलट महासंघ ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू को 25-09-2025 को पत्र लिखकर अहमदाबाद विमान हादसे की जांच प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि उसे विश्वसनीय जानकारी मिली है कि सरकार या मंत्रालय ड्राफ्ट अंतिम जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले एक स्वतंत्र समिति से उसकी समीक्षा कराने पर विचार कर रहा है। ऐसे में यदि कोई स्वतंत्र तंत्र बनाया जा रहा है तो भारतीय पायलट महासंघ को औपचारिक रूप से नामित किया जाना चाहिए और समिति में उसका प्रतिनिधित्व होना चाहिए। पायलट संगठन का मानना है कि जांच प्रक्रिया में उनकी भागीदारी से रिपोर्ट की विश्वसनीयता और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।
स्वतंत्र समिति में प्रतिनिधित्व की मांग
भारतीय पायलट महासंघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ड्राफ्ट अंतिम जांच रिपोर्ट की समीक्षा के लिए कोई स्वतंत्र समिति गठित की जा रही है तो उसमें संगठन को औपचारिक रूप से शामिल किया जाए। संगठन का तर्क है कि पायलट समुदाय विमानन सुरक्षा और जांच प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष हितधारक है। इसलिए उनकी राय और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि स्वतंत्र तंत्र बनाए जाने की स्थिति में महासंघ को नामित कर प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। पायलट संगठन चाहता है कि जांच के हर महत्वपूर्ण चरण में उनकी आवाज सुनी जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका या संदेह की गुंजाइश न रहे।
अहमदाबाद विमान हादसे की पृष्ठभूमि
12-06-2025 को एयर इंडिया का एआई-171 विमान अहमदाबाद से उड़ान भरने के कुछ ही क्षण बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर प्रकार के इस विमान में हुई दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा देश के विमानन इतिहास की सबसे गंभीर दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है। हादसे के बाद जांच एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच शुरू की गई थी और अब ड्राफ्ट अंतिम रिपोर्ट तैयार किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इस पूरी प्रक्रिया पर पायलट समुदाय की नजर बनी हुई है क्योंकि इसमें उनकी पेशेवर चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं।
ड्राफ्ट अंतिम जांच रिपोर्ट की समीक्षा
सरकार द्वारा ड्राफ्ट अंतिम जांच रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले एक स्वतंत्र समिति से उसकी समीक्षा कराने पर विचार किया जा रहा है। भारतीय पायलट महासंघ का कहना है कि यदि ऐसा कोई तंत्र बनाया जा रहा है तो उसमें पायलटों के प्रतिनिधि को शामिल करना जरूरी है। संगठन का मानना है कि जांच रिपोर्ट में तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ परिचालन संबंधी बातों पर भी गौर करने की जरूरत होती है। पायलट समुदाय का अनुभव और उनका दृष्टिकोण रिपोर्ट को अधिक संतुलित और व्यावहारिक बना सकता है। इसलिए समिति में उनकी औपचारिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पायलटों की चिंता और अपेक्षा
पायलट संगठन की इस मांग के पीछे विमानन सुरक्षा को लेकर उनकी गहरी चिंता झलकती है। वे चाहते हैं कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रहे। किसी भी तरह की आशंका या पक्षपात की संभावना को खत्म करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। भारतीय पायलट महासंघ का मानना है कि उनकी भागीदारी से न सिर्फ रिपोर्ट की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय भी अधिक प्रभावी तरीके से सुझाए जा सकेंगे। संगठन ने मंत्रालय से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
अब सबकी नजर मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हुई है। यदि स्वतंत्र समिति का गठन होता है तो उसमें किन-किन पक्षों को शामिल किया जाता है यह महत्वपूर्ण होगा। पायलट संगठन की मांग को लेकर विमानन क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि जांच प्रक्रिया में सभी हितधारकों की भागीदारी से रिपोर्ट अधिक विश्वसनीय बनेगी। आने वाले दिनों में मंत्रालय द्वारा इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय लिए जाने की संभावना है। पायलट समुदाय इस मामले पर लगातार नजर रखे हुए है।