नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर आज शहीद भगत सिंह और संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर जीवित होते, तो व्यवस्था पर सवाल उठाने के कारण उन्हें भी ‘दिमागी नक्सल’ कहा जाता। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना और व्यवस्था में बदलाव की मांग करना ‘दिमागी नक्सल’ होना है, तो उन्हें इस पहचान पर गर्व है।
‘हाँ, मैं दिमागी नक्सल हूँ’
केजरीवाल ने पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग देश में भ्रष्टाचार खत्म करने, बेहतर सरकारी स्कूल और अस्पताल, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करते हैं और सरकार से सवाल पूछते हैं, उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सरकार या भाजपा से डरने के बजाय सवाल उठाता है, उसे भी इस श्रेणी में रखा जा सकता है। केजरीवाल ने भगत सिंह और डॉ. आंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वे आज जीवित होते और मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते, तो संभव है कि उन्हें भी इसी तरह निशाना बनाया जाता। उन्होंने आगे कहा कि अगर देशभक्ति और बेहतर व्यवस्था की मांग करना ‘दिमागी नक्सल’ होना है, तो उन्हें इस पर गर्व है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि का वह पूरी ताकत से विरोध करेंगे।
पीएम मोदी के बयान पर क्यों शुरू हुआ विवाद?
15 अगस्त को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश ने जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन समाज में मौजूद कुछ ‘दिमागी नक्सल’ अब भी लोगों को गुमराह करने और हिंसा व अराजकता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें समाज से अलग-थलग करने की अपील की थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के बयान को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, TMC सांसद महुआ मोइत्रा और AAP के कई नेताओं ने भी ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर प्रतिक्रिया दी। AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार से रोजगार, पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर सवाल पूछने वाले युवाओं और छात्रों को निशाना बनाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाजपा ने दी सफाई
विपक्ष के आरोपों पर भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री का निशाना विपक्षी नेताओं या सरकार की आलोचना करने वाले सामान्य नागरिकों पर नहीं था। भाजपा के अनुसार, ‘दिमागी नक्सल’ शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया जो कथित तौर पर माओवादी हिंसा, अलगाववादी गतिविधियों या भारत की संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली गतिविधियों का समर्थन करते हैं। इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है। विवाद का केंद्र यह सवाल बना हुआ है कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का दायरा किन लोगों तक माना जाए और क्या सरकार की आलोचना को इस श्रेणी में रखा जा सकता है।