कोलकाता (नबन्ना): पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के बाद दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र (पहाड़) की राजनीति और विकास के समीकरणों ने एक नई करवट ली है। शुक्रवार को राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय 'नबन्ना' में मुख्यमंत्री सुवेंदु शुभेंदु अधिकारी के साथ बिमल गुरुंग और रोशन गिरी ने एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक की। पहाड़ के प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के विकास और नागरिक सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक एलान किए हैं।
इस बैठक का सबसे बड़ा और तात्कालिक प्रभाव यह हुआ है कि राज्य सरकार ने पहाड़ की तीन प्रमुख नगर पालिकाओं (Municipalities) में तत्काल प्रभाव से प्रशासक (Administrators) नियुक्त करने का फैसला किया है।
नागरिक सेवाएं बहाल रखने के लिए 3 नगर पालिकाओं में प्रशासक
नबन्ना सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहाड़ के आम नागरिकों को मिलने वाली सरकारी व नागरिक सेवाएं किसी भी तरह से प्रभावित न हों, इसे सुनिश्चित करने के लिए यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की कि दार्जिलिंग को छोड़कर पहाड़ की बाकी तीन नगर पालिकाओं— कालिम्पोंग, कर्सियांग और मिरिक में फिलहाल प्रशासनिक काम-काज संभालने के लिए प्रशासक बैठाए जा रहे हैं।
इस बैठक में दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट भी विशेष रूप से उपस्थित थे। सांसद को साथ रखकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिमल गुरुंग और रोशन गिरी की मांगों को मान्यता देते हुए पहाड़ में विकास की गति को तेज करने के लिए सभी पुराने गतिरोधों और उलझनों को खत्म कर दिया गया है और काम का रास्ता पूरी तरह साफ है।
GTA की सुस्ती पर बरसे मुख्यमंत्री; पहाड़ के लिए ₹3 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट
पर्वतीय क्षेत्र के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को पूरी तरह बदलने और विकास को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री ने एक विशाल वित्तीय पैकेज का एलान किया। उन्होंने पहाड़ की विशेष विकास योजनाओं के लिए कुल 3 लाख करोड़ रुपये आवंटित** करने की घोषणा की।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने 'गोरखाालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन' (GTA) के पिछले काम-काज के तरीकों की कड़े शब्दों में आलोचना की। पूर्ववर्ती व्यवस्था और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा:
"अब तक हर वित्तीय वर्ष में पहाड़ के विकास के लिए एक निश्चित और बड़ी धनराशि आवंटित की जाती रही है, लेकिन इसके बावजूद जीटीए (GTA) जमीन पर कोई ठोस काम करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ।"
काम में तेजी लाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अब विकास योजनाओं को फाइलों से निकालकर जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए। इसके लिए उन्होंने जीटीए की प्रिंसिपल सेक्रेटरी (प्रधान सचिव) शमा परवीन को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि प्रधान सचिव स्थानीय विधायकों और सांसदों के साथ निरंतर समन्वय (तालमेल) बनाए रखें और बिना किसी देरी के अत्यंत तीव्र गति से सभी विकास कार्यों को आगे बढ़ाएं। राज्य में सरकार बदलने के साथ ही कुनबे और जीटीए के इस नए तालमेल से पहाड़ के लोगों में विकास की नई उम्मीदें जाग गई हैं।