देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती भूमिका और डिजिटल माध्यमों के प्रभाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने तथाकथित ‘जेन-जी’ (Gen-G/Gen Z) युवा वर्ग के साथ संवाद बढ़ाने की दिशा में संगठनात्मक प्रयास तेज कर दिए हैं। हाल के छात्र आंदोलनों और युवाओं के बीच बदलते सामाजिक एवं डिजिटल व्यवहार के बाद पार्टी नेतृत्व इस वर्ग तक नए माध्यमों से पहुंच बनाने की रणनीति तैयार कर रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक संदेश देना नहीं, बल्कि युवाओं की अपेक्षाओं, प्राथमिकताओं और संवाद शैली को समझते हुए संगठन के प्रति विश्वास को और मजबूत करना है।
युवा संवाद को लेकर बदली जा रही है संगठनात्मक रणनीति
पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार हाल के घटनाक्रमों के बाद भाजपा ने सबसे पहले अपने छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों के साथ संवाद की प्रक्रिया प्रारंभ की। इस पहल का उद्देश्य युवाओं की सोच, उनकी आकांक्षाओं और समकालीन सामाजिक मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण को समझना बताया जा रहा है। संगठन का मानना है कि बदलते समय में युवाओं के साथ प्रभावी संवाद के लिए पारंपरिक राजनीतिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक संचार माध्यमों को भी समान महत्व देना आवश्यक है।
डिजिटल मंचों पर बढ़ेगी सक्रियता
भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों का कहना है कि युवा वर्ग तक पहुंचने के लिए उन डिजिटल मंचों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां नई पीढ़ी सबसे अधिक सक्रिय रहती है। पार्टी की रणनीति में सामाजिक माध्यमों के माध्यम से संवाद, रचनात्मक सामग्री तैयार करना और युवाओं से सीधे जुड़ने वाले अभियानों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। हालांकि पार्टी ने अभी विस्तार से यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन अभियानों का स्वरूप क्या होगा, लेकिन संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में डिजिटल संचार संगठनात्मक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
छात्र राजनीति के माध्यम से युवा नेतृत्व को मिलेगा अवसर
सूत्रों के अनुसार आगामी छात्रसंघ चुनावों में भी इस नई रणनीति की झलक देखने को मिल सकती है। पार्टी का मानना है कि छात्र राजनीति युवा नेतृत्व तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। इसी सोच के अनुरूप दिल्ली में संगठनात्मक बदलावों के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ से जुड़े रहे रजत चौधरी को भारतीय जनता युवा मोर्चा की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही पूर्व छात्र प्रतिनिधियों गौरव खारी, रोहित चहल और कृष्ण देव सिंह को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया गया है।
जेन-जी सम्मेलन के माध्यम से युवाओं तक पहुंचने का प्रयास
पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी ने हाल ही में दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में ‘जेन-जी सम्मेलन’ आयोजित किया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं को देश के विकास का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत की बड़ी आबादी युवा है और उनकी ऊर्जा सामाजिक परिवर्तन तथा आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार की स्टार्टअप नीति, नवाचार को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए युवाओं से उद्यमिता और कौशल विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भाजपा नेतृत्व का दावा—युवा हमेशा संगठन की प्राथमिकता रहे हैं
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि भाजपा का बड़ा नेतृत्व छात्र राजनीति और युवा मोर्चा से निकलकर आगे आया है। उनके अनुसार पार्टी ने हमेशा युवाओं को नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में अवसर देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ संवाद की परंपरा आगे भी जारी रहेगी और संगठन समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जिनके माध्यम से नई पीढ़ी को संगठन और सरकार की विभिन्न नीतियों से जोड़ा जा सके। उनका यह भी कहना था कि युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान में भी परिवर्तन के महत्वपूर्ण भागीदार हैं।
युवा मतदाता बने हुए हैं राजनीतिक रणनीति का केंद्र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश में बड़ी युवा आबादी और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण सभी प्रमुख राजनीतिक दल युवाओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और सामाजिक भागीदारी जैसे विषय युवा मतदाताओं की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। ऐसे में आने वाले समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच युवाओं को आकर्षित करने के लिए संगठनात्मक नवाचार, डिजिटल संवाद और प्रत्यक्ष जनसंपर्क अभियानों की प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।