राजधानी दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स 2026 सम्मेलन में भारत की मेजबानी का अंदाज केवल बैठकों और कूटनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। सम्मेलन को कवर करने पहुंचे देशी-विदेशी मीडियाकर्मियों के लिए एक विशेष उपहार किट तैयार की गई है, जिसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों की पहचान को बेहद सहज अंदाज में समेटने की कोशिश की गई है। विदेश मंत्रालय की ओर से दी जा रही इस किट में ब्रिक्स से जुड़े ब्रीफिंग दस्तावेजों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं, हस्तशिल्प और रोजमर्रा में उपयोग की जा सकने वाली कई चीजें रखी गई हैं। इसका उद्देश्य सम्मेलन में आए मेहमानों को भारत की विविधता से परिचित कराना भी है।
सत्तू और मखाने से दिखी बिहार की पहचान
उपहार किट खोलते ही जिन चीजों पर सबसे पहले नजर जाती है, उनमें सत्तू का पैकेट और मखाने का डिब्बा प्रमुख हैं। दोनों उत्पाद बिहार की खाद्य और सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़े हुए हैं। सत्तू लंबे समय से बिहार और आसपास के क्षेत्रों के पारंपरिक खान-पान का हिस्सा रहा है, जबकि मखाना भी राज्य की महत्वपूर्ण कृषि और खाद्य पहचान बन चुका है। इस तरह उपहार में इन दोनों वस्तुओं को शामिल करना केवल स्वाद का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र की स्थानीय परंपरा और उत्पादों को वैश्विक मेहमानों के सामने रखने का प्रयास है।
ओडिशा की कोरापुट कॉफी भी खास आकर्षण
किट में ओडिशा की कोरापुट कॉफी को भी जगह दी गई है। कोरापुट क्षेत्र की कॉफी अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय उत्पादन के कारण अलग पहचान रखती है। सम्मेलन में इसे शामिल करके पूर्वी भारत के एक ऐसे क्षेत्र की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है, जिसकी पहचान केवल पारंपरिक संस्कृति तक सीमित नहीं, बल्कि कृषि और स्थानीय उत्पादों से भी जुड़ी है। सत्तू और मखाने के साथ कॉफी का शामिल होना उपहार को भारत की अलग-अलग खाद्य परंपराओं और उत्पादन क्षेत्रों का छोटा-सा प्रतिनिधित्व बना देता है।
गुजरात की छाप वाला स्टॉल भी किट का हिस्सा
इस उपहार में गुजरात की पहचान को भी शामिल किया गया है। मीडियाकर्मियों को काले रंग का मुद्रित स्टॉल दिया जा रहा है, जिसका संबंध गुजरात की हस्तकला और वस्त्र परंपरा से जोड़ा गया है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान को एक ही उपहार में पिरोने की यह कोशिश देश की सांस्कृतिक विविधता को रेखांकित करती है। भोजन से लेकर वस्त्र और शिल्प तक, किट में ऐसी वस्तुओं को जगह दी गई है जिन्हें मेहमान अपने साथ यादगार के तौर पर रख सकते हैं और भारत से जुड़ी अपनी यात्रा के बाद भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
ब्रिक्स की पहचान वाले मग से लेकर डायरी तक
क्षेत्रीय उत्पादों के अलावा किट में सम्मेलन की अपनी पहचान से जुड़ी वस्तुएं भी रखी गई हैं। इसमें ब्रिक्स 2026 के चिह्न वाली पानी की बोतल और कॉफी मग शामिल हैं। इसके साथ फ्रिज मैग्नेट, डायरी और पेन जैसी उपयोगी वस्तुएं भी दी जा रही हैं। इस तरह उपहार में एक ओर भारत के विभिन्न राज्यों की झलक दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर सम्मेलन की स्मृति को सुरक्षित रखने वाली वस्तुएं भी शामिल हैं। पूरा सामान एक विशेष बैग में दिया जा रहा है, जिस पर ब्रिक्स की पहचान अंकित है।
दिल्ली की मेजबानी में पूरे भारत की झलक
इस उपहार किट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें भारत को केवल राजधानी दिल्ली की छवि तक सीमित करने के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। सम्मेलन भले ही दिल्ली में आयोजित हो रहा हो, लेकिन उपहार में बिहार, ओडिशा और गुजरात की पहचान को शामिल किया गया है। इससे यह संदेश भी जाता है कि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी क्षेत्रीय विविधताओं में निहित है। अलग-अलग राज्यों के उत्पादों और शिल्प को एक साथ रखकर मेहमानों को देश की बहुरंगी सांस्कृतिक तस्वीर से परिचित कराने की कोशिश की गई है।
कूटनीति के साथ संस्कृति की भी झलक
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में आधिकारिक उपहार अक्सर मेजबान देश की संस्कृति और प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम बनते हैं। ब्रिक्स 2026 की यह किट भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें महंगे या औपचारिक उपहारों के बजाय स्थानीय उत्पादों और उपयोगी वस्तुओं को प्राथमिकता दी गई है। सत्तू और मखाने से लेकर कोरापुट कॉफी और गुजरात की छाप वाले स्टॉल तक, हर वस्तु भारत के किसी न किसी हिस्से की कहानी कहती है। इस तरह एक छोटा-सा उपहार बैग सम्मेलन में आने वाले मेहमानों के लिए भारत की विविधता, स्थानीय उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत का यादगार परिचय बन रहा है।