दिल्ली में 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने उड़ान प्रशिक्षण संगठनों के संचालन पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। जारी निर्देश के मुताबिक यह रोक 11 सितंबर को सुबह 7 बजे से लागू होगी और 13 सितंबर रात 11 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में संबंधित राज्यों में संचालित उड़ान प्रशिक्षण संगठनों को किसी भी प्रकार की उड़ान गतिविधि करने की अनुमति नहीं होगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सम्मेलन के दौरान हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
उत्तर प्रदेश समेत 7 राज्यों में प्रशिक्षण उड़ानों पर रोक
निर्देश का असर उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में संचालित उड़ान प्रशिक्षण संगठनों पर पड़ेगा। इन राज्यों में स्थित किसी भी प्रशिक्षण संगठन से निर्धारित अवधि के दौरान विमान को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध केवल सामान्य प्रशिक्षण विमानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न श्रेणियों के हल्के और सूक्ष्म-हल्के विमान तथा अन्य संबंधित हवाई साधन भी इसके दायरे में आएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली के आसपास संभावित हवाई गतिविधियों को सीमित कर सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है।
हल्के विमान से हेलीकॉप्टर तक पर लागू होगा आदेश
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में किसी भी उड़ान प्रशिक्षण संगठन से कोई विमान उड़ान नहीं भर सकेगा। इसमें हल्के विमान, सूक्ष्म-हल्के विमान और हेलीकॉप्टर जैसे हवाई साधन भी शामिल हैं। आदेश के अनुसार, इनका संचालन ही नहीं बल्कि प्रशिक्षण केंद्र से उड़ान शुरू करना भी प्रतिबंधित रहेगा। इस व्यापक व्यवस्था का उद्देश्य सम्मेलन के दौरान अनधिकृत या अप्रत्याशित हवाई गतिविधियों की किसी भी संभावना को कम करना है। सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद यह सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
दिल्ली के 300 किलोमीटर दायरे में भी कड़े प्रतिबंध
सुरक्षा व्यवस्था केवल उड़ान प्रशिक्षण संगठनों तक सीमित नहीं है। निर्धारित अवधि में दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में हल्के और सूक्ष्म-हल्के विमानों, मानवरहित हवाई वाहनों तथा इसी तरह के लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले हवाई उपकरणों के संचालन पर भी रोक रहेगी। इससे दिल्ली के आसपास बड़े क्षेत्र में अनधिकृत हवाई गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण आसान होगा। सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधिमंडल शामिल होने के कारण सुरक्षा एजेंसियां हवाई क्षेत्र को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। ऐसे में असामान्य उड़ानों की संभावना को पहले से नियंत्रित करना सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
100 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन और पैराग्लाइडिंग भी प्रतिबंधित
दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे में कम दूरी तक उड़ान भरने वाले कई हवाई उपकरणों के संचालन पर भी रोक लगाई गई है। इसमें हैंग-ग्लाइडर, पैराग्लाइडर, पैरामोटर, एयरो-मॉडल और सभी प्रकार के ड्रोन शामिल हैं। इसके अलावा समान प्रकृति वाले अन्य कम दूरी के हवाई वाहनों पर भी यह प्रतिबंध लागू होगा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अनधिकृत हवाई गतिविधि को रोकने की कोशिश की जा रही है। विशेष रूप से ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए यह व्यवस्था सम्मेलन स्थल और उसके आसपास सुरक्षा घेरे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुरक्षित और सुचारु आयोजन के लिए एहतियाती कदम
उड़ान प्रशिक्षण निदेशालय की ओर से भेजे गए ईमेल में इन प्रतिबंधों को एहतियाती सुरक्षा व्यवस्था बताया गया है। निदेशालय के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सुरक्षित और सुचारु संचालन सुनिश्चित करना है। सम्मेलन के दौरान हवाई क्षेत्र में किसी भी अप्रत्याशित गतिविधि से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए पहले से व्यापक नियंत्रण लागू किया गया है। 7 सितंबर को जारी संचार के आधार पर संबंधित उड़ान प्रशिक्षण संगठनों को निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। 13 सितंबर रात 11 बजे के बाद इन अस्थायी प्रतिबंधों की अवधि समाप्त हो जाएगी, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से कोई नया निर्देश जारी न किया जाए।