नई दिल्ली: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू किया गया है। एयरपोर्ट प्रशासन एक अत्याधुनिक स्वचालित ‘एयर ट्रेन’ प्रणाली विकसित करने जा रहा है, जो टर्मिनल-1, टर्मिनल-2, टर्मिनल-3, एरोसिटी और कार्गो क्षेत्र को आपस में जोड़ेगी। इस परियोजना का उद्देश्य यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें टर्मिनल बदलने के लिए सड़क मार्ग या लंबी पैदल दूरी पर निर्भर न रहना पड़े। माना जा रहा है कि यह योजना दिल्ली एयरपोर्ट को दुनिया के प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच लिया गया बड़ा फैसला
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हर साल करोड़ों यात्री यहां से यात्रा कर रहे हैं, जिससे एयरपोर्ट के मौजूदा ढांचे पर दबाव बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट प्रशासन ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एयर ट्रेन परियोजना को मंजूरी दी है। अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था यात्रियों की आवाजाही को अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाएगी।
एक ही नेटवर्क में जुड़ेंगे सभी टर्मिनल और एरोसिटी
प्रस्तावित योजना के तहत एयरपोर्ट के सभी प्रमुख टर्मिनलों के साथ एरोसिटी और कार्गो सिटी को एकीकृत नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे कनेक्टिंग फ्लाइट लेने वाले यात्रियों को टर्मिनल बदलने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। एयरपोर्ट परिसर के भीतर ही एक आधुनिक ट्रांजिट सिस्टम उपलब्ध होगा, जिससे यात्रियों का सफर पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक बन सकेगा।
वैश्विक तकनीक पर आधारित होगी परियोजना
एयर ट्रेन परियोजना के लिए आधुनिक तकनीक का चयन किया जा रहा है। इसके लिए दक्षिण कोरिया, जकार्ता, इटली और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में संचालित उन्नत एयरपोर्ट ट्रांजिट सिस्टम का अध्ययन किया गया है। हालांकि परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन में भारतीय कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है, जिससे घरेलू उद्योग और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
बोर्डिंग पास स्कैन कर सकेंगे यात्रा
नई प्रणाली में यात्रियों को एयर ट्रेन में प्रवेश करने के लिए अपना बोर्डिंग पास स्कैन करना होगा। व्यस्त समय के दौरान कुछ रूटों पर ट्रेन बिना अतिरिक्त स्टॉप के सीधे संचालित की जाएगी। इससे कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने वाले यात्रियों को विशेष लाभ मिलेगा और उनका समय भी बचेगा। एयरपोर्ट प्रशासन का दावा है कि इससे टर्मिनलों के बीच यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।
कार्गो संचालन को भी मिलेगा बड़ा फायदा
यह परियोजना केवल यात्रियों तक सीमित नहीं होगी। एयरपोर्ट प्रशासन कार्गो स्टेशन और टर्मिनल क्षेत्र के बीच स्काईवॉक विकसित करने की भी योजना बना रहा है। इससे लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दिल्ली एयरपोर्ट की कार्गो क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
ढाई साल में पूरा होगा 4000 करोड़ का प्रोजेक्ट
करीब 4000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को अगले ढाई वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। एयर ट्रेन लगभग 7.7 किलोमीटर लंबे मार्ग पर संचालित होगी। इसमें से 5.7 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, जबकि करीब 2 किलोमीटर हिस्सा जमीन पर बनाया जाएगा। यह नेटवर्क एयरपोर्ट के विभिन्न हिस्सों को जोड़ते हुए यात्रियों की आवाजाही को अधिक सहज बनाएगा।
ट्रांजिट यात्रियों को मिलेगी मुफ्त सुविधा
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, कनेक्टिंग फ्लाइट लेने वाले ट्रांजिट यात्रियों के लिए एयर ट्रेन सेवा पूरी तरह मुफ्त होगी। हालांकि अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए शुल्क निर्धारित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट क्षमता, तकनीक और यात्री सुविधाओं के मामले में दुनिया के प्रमुख एयरपोर्ट्स की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।
AI तकनीक पहले से कर रही है भीड़ प्रबंधन
दिल्ली एयरपोर्ट यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले ही कई आधुनिक तकनीकों को अपना चुका है। एयरपोर्ट पर AI आधारित कतार प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों में भीड़ का विश्लेषण कर यात्रियों की आवाजाही को संतुलित रखने में मदद करती है। एयर ट्रेन परियोजना को इसी तकनीकी उन्नयन की अगली बड़ी कड़ी माना जा रहा है।