नई दिल्लीः बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम और डिजिटल एडिक्शन के कारण हजारों बच्चों की जान गई है। इस दावे के सामने आने के बाद अभिभावकों और विशेषज्ञों के बीच चिंता का माहौल बन गया है।
डिजिटल लत बना गंभीर खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोबाइल, वीडियो गेम और सोशल मीडिया की बढ़ती लत बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से नींद की कमी, तनाव, अवसाद और व्यवहार में बदलाव जैसे कई खतरे बढ़ जाते हैं।
20,000 मौतों के दावे से हड़कंप
इस दावे में कहा गया है कि डिजिटल लत से जुड़ी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई है। हालांकि इस आंकड़े को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इसने समाज में चिंता जरूर बढ़ा दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टर्स और साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक उपयोग बच्चों के दिमागी विकास और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।
अभिभावकों की भूमिका अहम
विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के डिजिटल उपयोग पर नजर रखें और उन्हें आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। परिवार के साथ समय बिताना और संतुलित दिनचर्या अपनाना इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकता है।
सरकार और संस्थाओं की जिम्मेदारी
इस मुद्दे को लेकर अब सरकार और संबंधित संस्थाओं की भूमिका भी अहम हो गई है। माना जा रहा है कि बच्चों में डिजिटल लत को कम करने के लिए जागरूकता अभियान और सख्त दिशा-निर्देश लाने की जरूरत है।
बढ़ती समस्या पर सख्त कदम जरूरी
बच्चों में डिजिटल एडिक्शन तेजी से एक बड़ी सामाजिक समस्या बनता जा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।