यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को शामिल किया गया है।
‘एआई फॉर ऑल’ कोर्स को अनिवार्य
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) की पहल पर अब कक्षा 9 से 12 तक संचालित सभी वोकेशनल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ‘एआई फॉर ऑल’ कोर्स को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है। यह पहल आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगी, जिसके अंतर्गत 4 घंटे का विशेष एआई कोर्स प्रशिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं के लिए अनिवार्य किया गया है। यह उत्तर प्रदेश के स्कूली शिक्षा ढांचे में तकनीक के समावेश की दिशा में एक अभिनव और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
छात्रों को मिले आधुनिक शिक्षा
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के नेतृत्व में छात्रों को निरंतर भविष्य के रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है। ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 210 घंटे का निःशुल्क कौशल विकास कार्यक्रम है, जिसमें आईटी, ब्यूटी, हेल्थकेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। अब इस कार्यक्रम में ‘एआई फॉर ऑल’ को जोड़ते हुए छात्रों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से भी सशक्त बनाया जाएगा, जिससे वे शिक्षा पूर्ण करने के साथ ही रोजगार के लिए तैयार हो सकें।
कस्टमाइज्ड एआई मॉड्यूल तैयार किए गए
छात्रों की रुचि और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए आईटी कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव, टेलरिंग, हेल्थकेयर, डिजिटल मित्र और अन्य प्रमुख जॉब रोल्स के लिए 4 घंटे के कस्टमाइज्ड एआई मॉड्यूल भी तैयार किए गए हैं, जिससे छात्र अपने-अपने क्षेत्र में एआई के व्यावहारिक उपयोग को समझ सकें।गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रशिक्षकों को पहले ‘एआई फॉर ऑल’ कोर्स पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
'AI फॉर ऑल' कोर्स स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव है
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के अंतर्गत ‘एआई फॉर ऑल’ की शुरुआत स्कूली शिक्षा में एक बड़ा बदलाव है। इससे कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बुनियादी समझ और इसके व्यावहारिक प्रयोग में दक्ष बनाया जाएगा, ताकि वे भविष्य की तकनीकी चुनौतियों को अवसरों में बदल सकें। यह पहल उत्तर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है